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संतश्री आशारामजी आश्रम
संतश्री आशारामजी बापू मार्ग,साबरमती अमदावाद-५
दिनांक : 1 दिसम्बर 2012
प्रेसनोट
संत श्री आशारामजी बापू व आश्रम के खिलाफ लगाये गये सभी आरोप निराधार
आश्रम व बापूजी को बदनाम करने का सुनियोजित षड्यंत्र डी.के.त्रिवेदी कमीशन के सामने बापूजी ने किया खुलासा
अमदावाद- जुलाई 2008 में संत श्री आशारामजी गुरुकुल, अहमदाबाद में पढ़नेवाले दो बच्चों की अपमृत्यु के संबंध में बापूजी ने शनिवार को अमदावाद में इस मामले की जाँच कर रहे डी.के.त्रिवेदी कमीशन के सामने खुलाशा करते हुए कहा कि यह आश्रम को बदनाम करने का सुनियोजित षड्यंत्र था,आश्रम में कभी भी कोई तांत्रिक वधि नहीं हुई यह सब आश्रम को बदनाम करने के लिए षड़यंत्रकारियो द्वारा तरह- तरह से कहानिया बनाकर कुप्रचार का षड़यंत्र था|लेकिन अब खुलाशा हो चुका है|सभी आरोप निराधार साबित हुए है| शनिवार को बापूजी जी अमदावाद में त्रिवेदी कमीशन पहुँचे तब सम्पूर्ण गुजरात से भारी संख्या में श्रद्धालु भी यहाँ पहुँचे शाम तक श्रद्धालुओ की संख्या इतनी हो गई कि जब बापूजी आश्रम जाने के लिए गाड़ी में सवार होकर निकले तो पुष्प वर्षा से बापूजी की गाड़ी ढक सी गई|उल्लेखनीय है की इस मामले में 9-11-12 को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में आश्रम के सात साधकों पर आपराधिक धारा 304 लगाने की गुजरात सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सीबीआई से जाँच कराने की माँग को भी ठुकरा दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को मान्य रखा है ।
न्याय-सहायक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल),शव-परीक्षण (पोस्टमार्टम) आदि कानूनी एवं वैज्ञानिक रिपोर्टें बताती हैं कि बच्चों के शरीर के अंगों पर मृत्यु से पूर्व की किसी भी प्रकार की चोटें नहीं थीं। दोनों ही शवों में गले पर कोई भी जख्म नहीं था । सिर के बालों का मुंडन या हजामत नहीं की गयी थी। बच्चों के साथ किसीने सृष्टिविरुद्ध कृत्य नहीं किया था। बच्चों के शरीर में कोई भी रासायनिक विष नहीं पाया गया ।
एफएसएल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि दोनों बच्चों के शवों पर जानवरों के दाँतों के निशान पाये गये अर्थात् शवों के अंगों को निकाला नहीं गया था अपितु वे जानवरों द्वारा क्षतिग्रस्त हुए थे । दोनों बच्चों पर कोई भी तांत्रिक विधि नहीं की गयी थी । पुलिस, सीआईडी क्राइम और एफएसएल की टीमों के द्वारा आश्रम तथा गुरुकुल की बार-बार तलाशी ली गयी, विडियोग्राफी की गयी, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा साधकों से अनेकों बार पूछताछ की गयी परंतु उनको तांत्रिक विधि से संबंधित कोई सबूत नहीं मिला ।
जाँच अधिकारी द्वारा धारा 160 के अंतर्गत विभिन्न अखबारों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों तथा सम्पादकों को उनके पास उपलब्ध जानकारी इकट्ठी करने के लिए सम्मन्स दिये गये थे । ‘सूचना एवं प्रसारण विभाग, गांधीनगर’ द्वारा अखबार में प्रेस-विज्ञप्ति भी दी गयी थी कि किसीको भी आश्रम में यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि अथवा घटना होती है ऐसी जानकारी हो तो वह आकर जाँच-अधिकारी को जानकारी दे । यह भी स्पष्ट किया गया था कि जानकारी देनेवाले उस व्यक्ति को पुरस्कृत किया जायेगा एवं उसका नाम गुप्त रखा जायेगा । इस संदर्भ में भी कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आया ।
न्यायमूर्ति त्रिवेदी जाँच आयोग में बयानों के दौरान आश्रम पर झूठे, मनगढ़ंत आरोप लगानेवाले लोगों के झूठ का भी विशेष जाँच में पर्दाफाश हो गया । आश्रम प्रशासन द्वारा प्रारम्भ से ही जाँच में पूरा-पूरा सहयोग किया गया है ।
दीपेश-अभिषेक अपमृत्यु घटना के समय पूज्य बापूजी गुरुपूर्णिमा सत्संग-दर्शन के जाहिर कार्यक्रम के निमित्त 4 से 6 जुलाई को नागपुर (महा.) में थे । गुरुकुल की दैनिक कार्यवाही में पूज्य बापूजी की कोई भूमिका नहीं होती है। बालकों की अपमृत्यु मामले में पूज्य बापूजी पर कोई भी आरोप जाँच एजेंसियों द्वारा नहीं लगाये गये हैं। इस मामले से पूज्य बापूजी का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है ।
संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा 17000 बाल संस्कार केन्द्र, 40 गुरुकुल, 400 आश्रम, 1400 से अधिक योग वेदांत सेवा समितियाँ, अनेक गौशालाएँ, युवा सेवा संघ, महिला उत्थान मंडल, गरीबों आदिवासियों की सहायता के सेवाकार्य चलाये जा रहे हैं । पूज्य बापूजी संस्था में एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक की भूमिका में हैं । व्यवस्थासंबंधी कार्य आश्रम के संचालक तथा समितियों की देखरेख में होते हैं ।
पूज्य बापूजी को 7 बार, 10 बार, 14 बार सम्मन दिये गये लेकिन बापूजी हाजिर नहीं हुए। ऐसी बात नहीं है|वास्तव में पूज्य बापूजी को केवल एक ही बार सम्मन दिया गया था। कानूनी अधिकारों के तहत जाँच आयोग द्वारा पूज्य बापूजी के लिए यह व्यवस्था की गयी थी कि पूज्य बापूजी का बयान सभी गवाहों के बयान पूर्ण होने के बाद लिया जायेगा। तदनुसार सत्संग-कार्यक्रमों की व्यस्तता के बावजूद भी बापूजी अपना बयान दर्ज कराने हेतु जाँच आयोग के समक्ष दिनांक 1 दिसम्बर को उपस्थित हुए। पूज्य बापूजी न्यायपालिका का सम्मान करते हैं।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह स्वतः ही सिद्ध हो जाता है,कि संत श्री आशारामजी बापू व आश्रम पर लगाए गए सभी आरोप निराधार है|