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प्रभु की शरण के लिए गुरु की कृपा जरूरी : बापू आसाराम
प्रभु की शरण में जाने के लिए गुुरु की कृपा पाना जरूरी है। इसलिए मनुष्य को सच्चे मन से प्रभु का नाम लेना चाहिए। यह प्रवचन संत आसाराम बापू ने पठानकोट के दशहरा ग्राऊंड और शाहपुरकंडी के हैलीपैड पर आयोजित कार्यक्रम में कहे। आसा राम बापू ने कहा कि मणिमहेश यात्रा के दौरान वहां के लोगों द्वारा मास काटा जाता है, जोकि सनातन धर्म के विपरीत है। धर्मस्थल हमारे आस्था व पूजा के केंद्र हैं। इसलिए वहां पर सदा ही अच्छे व नेक काम होने चाहिए। संत सदा ही अपने भक्तों को सही मार्गदर्शन देता है। इसलिए सच्चे संत की शरण में जाने से ही मानव का कल्याण होता है। हमें समाज में लोगों की सेवा के लिए सदा ही तत्पर रहना चाहिए ताकि समाज सदा ही विकास की राह पर चल सके। इस मौके पर संत आसाराम बापू ने अपने भक्तों को और भी कथाएं सुनाई तथा प्रसाद वितरित कर आशीर्वाद दिया। इस मौके पर डिप्टी स्पीकर दिनेश सिंह बब्बू, बांध परियोजना के कार्यकारी अभियंता आरएल मित्तल, एसके गुरनाल, राज कुमार चौधरी, योग वेदांत समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान 'दिव्य प्रेरणा प्रकाश' साहित्य मुहैया करवाया गया। पठानकोट के दशहरा मैदान में आसाराम बापू के प्रवचनों को सुनने उमड़े श्रद्धालु। इस मौके पर नि:शुल्क बाल संस्कार प्रदर्शनी भी लगाई गई। पठानकोट के दशहरा मैदान में देर रात प्रवचन करते हुए आसा राम बापू ने कहा कि सुख-दु:ख, बचपन, जवानी और बुढ़ापा आते-जाते हैं,लेकिन जो इन सबको जान लेता है, वही आत्मा परमात्मा है। भगवान न तो दूर है और न ही दुर्लभ। हमें अपने को कभी बीमार नहीं समझना चाहिए, क्योंकि बीमारी आती है और चली जाती है। बापूजी ने कहा कि जब मनुष्य नीरस होता है, तब वह अपराधी पराधीन बनता है। सुख के लिए वह गलत काम करता है, लेकिन उसे सुख की बजाए दु:ख मिलता है। इसलिए मनुष्य को सत्संग में जाना चाहिए। कहा, सुख-दु:ख, बचपन, जवानी और बुढ़ापा आते-जाते हैं, लेकिन जो इन सबको जान लेता है, वही आत्मा परमात्मा है