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Gorakhpur Satsang Coverage

 

 

ओमकार परमात्मा की ध्वनि : आसाराम

गोरखपु, 20अप्रैल2012

गोरखपुर (एसएनबी)। आसाराम बापू का दो दिवसीय दर्शन सत्संग का कार्यक्रम पैडलेगंज स्थित चंपा देवी पार्क के विशाल मैदान में गुरुवार से प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर व्यासपीठ से बापू ने श्रद्धालुओं को ज्ञान की कुंजी पकड़ाते हुए कहा कि हरि सम जग कछु वस्तु नहीं, प्रेम पंथ सम पंथ, सदगुरू सम सज्जन नहीं, गीता सम नहीं ग्रंथ। भगवान के नाम से बढ़कर पूरी दुनिया में मूल्यवान कोई वस्तु नहीं है। भगवान के नाम में प्रीति के समान कोई पंथ नहीं हैं। जीते जी मुक्ति का ज्ञान देने वाले भगवान श्री कृष्ण के श्री मुख से निकली गीता के समान कोई ग्रंथ नहीं है। ओमकार परमात्मा की स्वाभाविक ध्वनि है। ओम मंत्र की महत्ता का वर्णन करते हुए बापू ने कहा कि ओमकार मंत्र का गुंजन करने से मरी हुई कोशिकाएं भी जिवित हो जाती हैं। मस्तिष्क, जिगर व पेट के विभिन्न अंग आंदोलित होकर सक्रियता से कार्य करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के बोस्टन, कैलिफोर्निया आदि शहरों में ओमकार थेरेपी सेंटर खोले गए हैं। बापू जी ने कहा कि ओमकार मंत्र की महिमा के 16 हजार श्लोक हैं। इससे मन की मलिनता दूर होती है और बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रकाश होने लगता है। ओमकार मंत्र सात बार गुंजन करने से इस ब्रह्मांड को पार कर अनंत ब्रह्मांडों के साथ जापक के चित को तदाकार कर देता है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति 120 माला ओमकार का जप करे तथा निषिद्ध कर्मो का त्याग करे तो उसे एक वर्ष में ही परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है। दुख पर आत्मज्ञानी संत आशाराम ने कहा कि दुख आता है आसक्ति छुड़ाने व विवेक तथा वैराग्य जगाने के लिए। जितना दुख से विकास होता है उतना सुख से नहीं हो सकता। अपने आत्मस्वरूप की स्मृति करो व सुख-दुख को आने-जाने वाला जानकर सम रहो। उन्होंने कहा कि सद्गुरू से प्राप्त मंत्र दीक्षा से 33 प्रकार के आध्यात्मिक लाभ भी सहज में होने लगते हैं। यही मंत्र अगर सदगुरू द्वारा प्राप्त हो और गुरू के बताए मार्ग कर साधक अगर श्रद्धा, तत्परता और संयम से लगा रहे तो वह अपने जीवन के परम लक्ष्य आत्म-साक्षात्कार को सहज ही प्राप्त कर लेता है। इसलिए जीवन में सद्गुरू की अत्यंत आवश्यकता है। बापू ने श्रद्धालुओं को सावधान करते हुए कहा कि अमावस्या, पूर्णिमा, जन्माष्टमी, शिवरात्रि, दीपावली व शुभ पवरें और जन्मदिन पर पति पत्री का संसार व्यवहार करने से अति हानि होती है। अगर गर्भधारण हो जाए तो संतान विकलांग पैदा होती है इसलिए भूलकर भी ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए। ब्रह्म वृक्ष पलास के फूलों का शरबत का बंटा प्रसाद सत्संग स्थल पर श्रद्धालुओं को 132 प्रकार के रोगों को दूर करने वाली दिव्य औषधि हरड़ रसायन का प्रसाद बांटा गया। यह औषधि त्रिदोष शामक शरीर को शुद्ध करनेवाला उत्तम रसायन योग है। उदर, संग्रहणी, अम्लपित, इसको चूसकर सेवन करने से भूख खुलती है। अजीर्णशूल,अफारा कष्ट दूर करती है। कब्ज आदि पेट के विकार दूर होते हैं। छाती व पेट में संचित कफ, यकृत विकारों, किडनी के रोग, जीर्णज्वर, कमर दर्द, वातरक्त, आमवात, बवासीर लाभ होता है। ह्दय के लिए लाभदायक व श्रमहर है। सत्संग स्थल पर आसाराम बापू आश्रम द्वारा आयुव्रेदिक, होमियोपैथिक, प्राकृतिक चिकित्सा उपलब्ध करायी गयी

 

 

 

 

 

 

 

ओम जप, सद्गुरु से प्रीति, सत्संगी का साथ.. मोक्ष पाओगे

गोरखपु, 21अप्रैल2012

प्रतिनिधि, गोरखपुर : जोगी रे क्या जादू है तेरे प्यार में, जबसे तेरा दर्शन पाया दूर हुई नादानी, छुट गए पाप हुए हम पावन, मिट गई आवन-जानी, हो जोगी रे.. अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संत आशाराम बापू के भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु इसी भजन को गाकर अपने सद्गुरु पर बलिहारी जा रहे थे। शुक्रवार को चंपा देवी पार्क में दूसरे दिन भी अनगिनत भक्तों ने आकर बापू के वचनामृत का रसपान किया। श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पंडाल में बापू ने सुबह व शाम दोनों वक्त प्रवचन के माध्यम से ओम मंत्र का निरंतर जप, सद्गुरु से सच्ची प्रीति तथा गुरमुख सत्संगी का साथ करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इन बातों को अपना लिया तो सारे दुख, पाप, संताप मिट जाएंगे और मोक्ष के गामी बनोगे। योग वेदांत समिति द्वारा आयोजित विशेष सत्संग के अंतिम दिन बापू ने अनेक महापुरुषों व संतों के जीवन की साखियों को सुनाकर भक्तों को भक्ति के गूढ़ रहस्यों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ओम मंत्र परमात्मा की स्वभाविक ध्वनि है। दूषित कर्मो से विरत रहते हुए यदि एक वर्ष इस महामंत्र की 120 माला का जाप किया जाए तो एक वर्ष में परमात्मा से साक्षात्कार हो जाएगा। बापू ने प्रत्येक परिस्थितियों में सम रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में अनुकूलता व प्रतिकूलता की स्थिति से डर कर भागना या घबड़ाना नही, बल्कि इसका बोध रख परमात्मा से निकटता बनाई रखनी चाहिए। तभी कल्याण होगा। हर क्षण आत्म स्वरूप की स्मृति करो, क्योंकि भगवान से प्रीति नही तो जीवन का हर रस नीरस हो जाएगा। गंधर्व और अजानन देव ही नही देवराज इन्द्र भी आत्म साक्षात्कार को प्राप्त भाग्यवान के आगे नतमस्तक होते हैं। इसलिए सच्चे सद्गुरु की शरण प्राप्त कर आत्मज्ञानी बनो। सत्संग में आए युवाओं, विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों को संत प्रवर ने पाश्चात्य सभ्यता के मोहपाश को त्याग संस्कारित बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यौवन की रक्षा करो, सदाचारी बनो और गुरु की शरण में आकर जीवन धन्य करो। जब जे मार्गन जैसा सांईटिस्ट ओम मंत्र पर रिसर्च कर इसकी महानता का गुणगान कर रहा है तो तुम भी जान लो कि सतोगुणी जीवन और ओम मंत्र में वह शक्ति है कि इसके द्वारा साक्षात परब्रंा को प्राप्त किया जा सकता है। बापू सुबह-शाम दोनों समय आध्यात्मिक पाठशाला में ओम मंत्र जप, कुंभक प्राणायाम तथा प्रवचन के रसपान श्रद्धालुओं को कराते रहे। जिसका सत्संग-सेवा व दीक्षा की त्रिवेणी में डूबे लोगों ने भरपूर आनंद लिया। दूसरे दिन भी चली बापू की ट्रेन सत्संग स्थल पर शुक्रवार को भी दोपहर और शाम दोनों समय बापू एक्सप्रेस रेलगाड़ी खूब चली। प्रवचन के बाद बापू मंच से उतरकर डी गैलरी से होते हुए रेलगाड़ी पर आए। सायरन बजाते हुए गाड़ी भक्तों के बीच से गुजरी तो लोग आंचल फैलाकर गुरु की दुहाईयां गा रहे थे। बापू ने भी भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने कोई कमी नही की। जगह-जगह रेलगाड़ी रोक श्रद्धालुओं पर प्रसाद रूपी टाफियों की बौछार करते चल रहे थे। बापू के हाथों का प्रसाद पाने के लिए श्रद्धालुओं की बेकरारी देखने लायक रही। मुस्तैद रहे सेवादार विशाल सत्संग आयोजन को सफलता पूर्वक अंजाम देना काई आसान काम नही था, लेकिन बापू के सेवादारों ने इसे करके दिखाया। प्रवेश द्वार, पार्किंग, विविध स्टाल, भोजन व जलपान व्यवस्था, पंडाल के भीतर जल व शरबत वितरण, भीड़ पर कंट्रोल के लिए तैनात महिला-पुरुषों का सिक्योरिटी दल, चिकित्सकीय कैंप, योग शिविर सहित सभी जिम्मेदारी संत आशाराम बापू से दीक्षा प्राप्त श्रद्धालुओं के हाथ में थी। जिसके लिए वह पूरी निष्ठा से दिनरात लगे रहे। भीड़ के बावजूद जबरदस्त अनुशासन सत्संग में बापू के दर्शन व प्रवचन सुनने के लिए पूर्वाचल ही नही दूर-दराज के शहरों से हजारों श्रद्धालु आए थे। अपार भीड़ के बावजूद सत्संग पंडाल में जबरदस्त अनुशासन दिखा। प्रवचन के दौरान कोई हलचल नही। सभी लोग पूर्ण श्रद्धा से बापू को सुनने के लिए ध्यानमग्न रहे। यही नही बापू के आगमन से पूर्व उनके परम शिष्य स्वामी श्रेयानंद जी भी कथा व भजन गाते तो भी वातावरण में नि साइलेंस रहता। यदि बापू ने कहा कि साथ में भजन गाओ या फिर मंत्र उच्चारण करो तभी भक्तों की आवाज पंडाल में सुनाई दे रही थी। श्रद्धालुओं के इस अनुशासन ने सभी मन मोह लिया। बापू के चरणों में लेट गई युवती सायंकाल पौने सात बजे करीब बापू मंच से उतरकर रेलगाड़ी पर सवार होने आए। मंच के पास काफी भीड़ थी, लेकिन सिक्योरिटी में लगे सेवादारों ने सभी को हटाकर पीछे कर दिया। इस बीच जैसे ही बापू ट्रेन पर चढ़ने लगे तो महिलाओं की भीड़ से एक युवती रोते-बिलखते हुए बापू के चरणों में लेट गई। बापू ने युवती को देखा और बिना कुछ बोले आशीर्वाद देकर आगे चले गए। बाद में सेवादारों ने उस युवती को खींचकर पीछे बैठा दिया। वह जब तक बैठी रही किसी से कुछ बोले बिना केवल बापू की ओर देखते हुए रोए जा रही थी। उसकी श्रद्धा देख सभी की आंखे नम हो गई। एक भगौना में पांच हजार लोगों का भोजन सत्संग स्थल पर भंडारा तैयार करने का स्टाल आकर्षण का केन्द्र रहा। यहां दर्जनों सेवादार हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनाने में लगे थे। विशेष बात कि भोजन स्टाल पर इतने बड़े-बड़े भगौने थे जिनमें पांच-पांच हजार लोगों का भोजन पकाया जा सकता था। दोपहर को इन भगौनों में सेवादार दाल, चावल, सब्जी बना रहे थे, जिन्हें देखने के लिए भीड़ लगी रही। महाराष्ट्र के जोड़े की शादी दोपहर में महाराष्ट्र प्रांत के अमरावती का एक युवक सचिन साहबराव गोड़की तथा आंबा की पूजा नामक लड़की ने मंच के सामने बापू का चरण स्पर्श कर विवाह कराने का आग्रह किया। दोनो के परिवार पहले से बापू के भक्त हैं और घर की मर्जी से शादी कर रहे थे। उनके साथ लड़के के पिता साहेब राव भी थे। बापू के आशीर्वाद के बाद दोनों एकदूसरे के गले में वरमाला डाल परिणय सूत्र में बंधे। बापू ने नवविवाहित जोड़े को सुखी जीवन का वर देते हुए दीक्षा व सत्संग करने को कहा। गोरखपुर की खूब हुई प्रशंसा गोरखपुर के सत्संग में अपार भीड़ देख बापू खूब गदगद रहे। दोनों दिन समागम में मंच से उन्होंने कई बार यहां के सत्संगियों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल से गोरखपुर वाले यहां आने के लिए पीछे ही पड़े रहे। उनकी मेहनत से प्रोग्राम बन ही गया। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ को देखकर मेरा आशीर्वाद है कि फूलो-फलो और खूब सत्संग करो। बापू ने यहां तक कह दिया कि भक्तों का प्रेम देखकर लगता है कि अब तो गोरखपुर बार-बार आना पड़ेगा। भक्तों ने पूछे सवाल मिला जवाब दोपहर सत्संग के दौरान सवाल-जवाब का दौर भी चला। बापू ने कहा कि भक्ति मार्ग की किसी भी समस्या के समाधान को लेकर श्रद्धालु प्रश्न पूछ सकते हैं। उसके बाद तो दर्जनों महिला-पुरुषों ने साधना में ध्यान न लगने, पूजा में रुकावट, मंत्रों के रहस्य, आत्मज्ञान कैसे हो तथा सच्ची श्रद्धा के विषय में सवाल किए। बापू ने बारी-बारी से सबके प्रश्नों का विस्तृत रूप से उत्तर देकर उन्हें भक्ति में दृढ़संकल्पित रहने का संकल्प दिलाया।

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  Comments

Dhanya hai Dorakhpur wale...
Created by Dharmendra in 4/29/2012 8:20:53 AMSadho sadho..Hariom
Wah Bapu Wah........Tumne to Gorahpur walo ko Nihal kar dala.....
Created by SHAMLAL BARETIYA in 4/29/2012 5:10:27 AMNew Comment
New Comment
Created by charu sharma in 4/24/2012 10:00:22 PMSadho....Sadho...
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Created by Gunjan in 4/22/2012 6:26:21 PMGurudev aapke agman se pavitra ho gaye gorakhpur nagare.hari om

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