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कानपुर-औरई सत्‍संग न्‍यूजपेपर कवरेज

 

 

 

 

 

दु:ख का आदर कर मानें उपकार 

 कानपुर 18दिसंबर2011

कानपुर, हमारे संवाददाता : दु:ख का आदर कर उसका उपकार मानना चाहिए। वह हमें कुछ न कुछ सिखाता ही है। यह बातें शास्त्रीनगर के सेंट्रल पार्क में आशाराम बापू ने कहीं। उन्होंने भजन सुना भक्तों को मुग्ध कर दिया। योग वेदांत समिति द्वारा आयोजित सत्संग में पहुंचे आशाराम बापू ने कहा कि मैं आपको नहीं जानता फिर भी मैं आपका हूं। उन्होंने कहा भगवान में हम हैं और हम में भगवान हैं। मरता शरीर है, आत्मा तो अजर अमर है इसलिए ईश्र्वर में मन लगाओ वही कल्याण करेगा। जो सोचते हैं कि वह परेशान हैं, बीमार हैं वह तकलीफ को बढ़ाते ही हैं। बीमारी और परेशानी के बारे में सोचना छोड़ दो, देखो दोनों गायब हो जाएंगी। बापू ने कहा स्वयं को महत्व दो क्योंकि तुम सबसे ज्यादा कीमती हो। सत्संग से जो ज्ञान मिलता है वह करोड़ों का होता है पर कुछ हजार कमाने के चक्कर में लोग सत्संग छोड़ देते हैं। उन्होंने भक्तों को ओमकार मंत्र का जाप करने को कहा। शारीरिक बीमारी को दूर करने के लिए इस मंत्र के जैसी कोई दवा नहीं है। आरपी सिंह, बलराम मनवानी, संतोष गुप्ता, महेश मेघानी, अनिल अवस्थी, डॉ. सुनील वानखेड़े, राजेश गुप्ता आदि रहे।

बदनाम करने को रचा गया था षड्यंत्र

बापू ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए 62 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे लेकिन भक्तों का विश्र्वास बढ़ता चला गया। अन्ना के आंदोलन पर उन्होंने कहा उनकी सफलता का राज ब्रंाचर्य, नियम बद्धता व कठोर परिश्रम है। अन्ना का आंदोलन जनहित के लिए है। इसीलिए आम आदमी उनके इशारे पर सबकुछ करने को तैयार है। जनलोकपाल बिल आने के बाद अन्ना टीम की जिम्मेदारी होगी कि वह इस कानून की सफलता के लिए काम करें।

मनोहारी नृत्य ने झुमाया

जोगी रे क्या जादू है तेरे प्यार में के भजन पर जब खुद बापू नाचे तो उनके साथ भक्त झूम उठे। बापू ईश्र्वर को समर्पित हो जब नृत्य कर रहे थे तो पंडाल भक्तिमय हो गया।

सत्संग के सूत्र वाक्य क्या करें

 

हमेशा खुश रहें व दूसरों को खुशी बांटें

ईश्वर में ध्यान लगायें क्योंकि वह आप में है

दु:ख का आदर करो और उसका उपकार मानो क्या न करें

बीमारी व परेशानी के बारे में मत सोचो

वस्तुओं को महत्व देना बंद करो

किसी को दु:खी करना सबसे बड़ा अपराध है

 

 

गुरुदीक्षा लेने वाले नरक में नहीं जाते

 कानपुर 19दिसंबर2011

कानपुर, जागरण प्रतिनिधि : गुरु का नाम सबसे ऊपर होता है। उसके बिना जीवन सफल नहीं होता। गुरुदीक्षा लेने वाले कभी नरक नहीं जाते। जिस प्रकार सच्ची भक्ति से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं, वैसे ही गुरु के प्रति सम्मान और भक्ति जरूरी है। यह बात संत आसाराम बापू ने शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल पार्क में योग वेदांत सेवा समिति के दो दिवसीय सत्संग के दूसरे दिन कही। सत्संग स्थल पर रविवार सुबह बच्चों सहित बड़ी संख्या में भक्तों को गुरुदीक्षा दिलाई गई। बापू ने कहा कि गाय का मल-मूत्र भी पवित्र माना जाता है। विज्ञान कहती है कि गाय का दूध सबसे बेहतर है। इसी प्रकार संत और गुरु निर्मल होता है। संत या गुरु का निंदक महा हत्यारा होता है। ओमकार मंत्र की महत्ता श्रेष्ठ है।

डीआईजी राजेश, सपने में मार लगाऊंगा

डीआईजी राजेश राय सत्संग स्थल पहुंचे तो बापू उनसे बोले, विक्रम सिंह भी डीआईजी थे, आशीर्वाद लिया तो डीजीपी बन गए थे। राजेश तुम भी बहुत ऊंचाई पाओगे। बापू की नजर तुम पर है। कहना नहीं मानोगे तो सपने में आकर मारूंगा। डीआईजी की ओर इशारा कर बापू ने उन्हें 20 पत्ती तुलसी और नींबू कारस मिलाकर गुनगुने पानी से लेने को कहा। इससे न तो कब्ज रहेगी और न ही हार्टअटैक होगा।

यूपी में बहुत सायरन बजते

पार्क के सामने से सायरन बजाती पुलिस की गाडि़यां निकलती देख बापू बोले कि यूपी में बहुत सायरन बजते हैं। पैसे देकर नहीं बुलाए भक्त बापू ने कहा कि भक्तों की भीड़ पैसे देकर नहीं बुलाई गई। यह तो भक्त और गुरु के बीच का संबंध है। आरोप लगाने वाले जेल गए मेरे ऊपर आरोप लगाने वाले और काला जादू करने करने की बात कहने वालों को ही जेल जाना पड़ा। हमारे गुरु ने कृपा की। आरोप रुपये लेकर लगाए गए थे।

मोबाइल हानिकारक

मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होता है। राग बसंती, राग साहनी, राग पहरी सुनने से इस हानि से बचा जा सकता है। अंग्रेजी दवाएं अभागी-निगोड़ी जरा सी बीमारी पर अंग्रेजी दवाएं लेने की प्रवृत्ति छोड़नी होगी। अंग्रेजी दवाएं अभागी और निगोड़ी हैं। यह रोग बढ़ा देती

सत्संग के सूत्र वाक्य :

क्या करें

आसन लगाओ, मन प्रसन्न व काया निरोगी रहेगी।

काले तिल और खजूर का सेवन सेहत के लिए जरूरी।

माला का जाप आसन पर बैठकर ही करें।

क्या न करें

दिन में स्त्री-पुरुष मिलन नहीं करना चाहिए। आंखें कमजोर होती हैं।

मां-बाप और गरीबों का अनादर न करें।

किसी के मन को न दुखाएं।  

 

 

बापू बोले : परमात्मा का स्वरूप ओम

उरई, हमारे प्रतिनिधि : संत आसाराम बापू ने कहा कि ओम ही परमात्मा स्वरूप है। नारायण ने ही ओम की खोज की है। यह सबसे शक्तिशाली मंत्र है। इससे तमाम असाध्य रोग दूर किये जा सकते हैं। व्यक्ति 120 मालायें प्रतिदिन ओम का जाप करें तो एक वर्ष में ही वह प्रभु के दर्शन कर सकता है।

जालौन रोड पर चुंगी के पास स्थित मैदान में बने भव्य पंडाल में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र, वासुदेव को स्मरण करने का मंत्र सभी में पहले ओम का प्रयोग होता है। ओमकार ही सबकुछ है। सत्संग पर बापू ने कहा कि बीती समय की बातों को सत्संग नहीं कहा जा सकता। उनको केवल कथायें या भाषण की संज्ञा दी जा सकती है। संत महापुरुषों के सानिध्य में आकर ही सत्संग का महत्व जाना जा सकता है। संत जो भी वाणी बोलते हैं वह वेदवाणी बन जाती है। साधना पर बोलते हुये उन्होंने कहा कि सद्गुरु के बताये हुये मार्ग पर साधना करने से जो फल प्राप्त होता है वह अपनी मनमर्जी से की गयी साधना से नहीं प्राप्त किया जा सकता।

बापू के आते ही दौड़ी भीड़

पौने तीन बजे जब आसाराम बापू की गाड़ी सत्संग स्थल पर पहुंची तो भक्तों की भीड़ गाड़ी के पीछे दौड़ पड़ी। जो लोग पंडाल के बाहर इधर-उधर खड़े थे उन्होंने दौड़कर पंडाल में अपना स्थान जमा लिया।

खचाखच भरा रहा पंडाल

संत आसाराम बापू के प्रवचन को सुनने के लिये श्रद्धालुओं से पंडाल खचाखच भरा रहा। महिलाओं की संख्या सबसे अधिक रही। आयोजकों ने महिला, पुरुष भक्तों के बैठने की व्यवस्था अलग-अलग कर रखी थी।

दूरदराज से आये श्रद्धालु

संत आसाराम बापू के अनुरागी दूर-दूर से उनके प्रवचन सुनने आये थे। कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, गाजियाबाद, इटावा, रमाबाई नगर, हमीरपुर से तो श्रद्धालु आये ही, कई प्रांतों से भी भक्तों ने आकर सत्संग का लाभ लिया।

गुरुदर्शन एक्सप्रेस से भक्तों के बीच पहुंचे बापू

मंच में प्रवचन करने के साथ बापू पंडाल में भक्तों के बीच पांच फीट ऊंची बनायी गयी ट्राली से पहुंचे और दर्शन दिये। यह ट्राली एक मोटर से संचालित थी। पंडाल में ट्राली के लिये लोहे की पतली पटरी भी बिछाई गयी थी।

बापू संग झूमे भक्त

भजनों पर बापू जब मंच पर थिरके तो श्रद्धालु भी अपने आप को थिरकने से नहीं रोक सके। भक्ति धुन पर जो जहां था भाव विभोर होकर थिरक रहा था।

स्टालों पर रही भीड़

गुरु साहित्य, आश्रम की बनी औषधियां खरीदने के लिये स्टालों पर भारी भीड़ रही। मैदान पर लगभग 21 स्टाल लगाये गये थे। भक्तों ने स्टालों पर जमकर खरीददारी की।

पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में न आयें युवा

बापू ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिये। पाश्चात्य संस्कृति हमारी संस्कृति को नष्ट कर रही है। युवा तेजी से उसके प्रभाव में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सबसे श्रेष्ठ है।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम

सुरक्षा के लिहाज से व्यापक इंतजाम किये गये थे। भारी पुलिस, पीएसी बल तो मौजूद था ही, फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मैदान में खड़ी रही।

 

 

 

 श्रीकृष्ण भक्ति में बापू संग डूबे भक्त

कानपुर (एसएनबी)। शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क उस समय कृष्णमय हो गया जब संत आसाराम बापू श्रीकृष्ण भजन में स्वयं तो रमे ही साथ ही भक्तों को भी डूब जाने को मजबूर कर दिया। एक ओर मंच पर जहां बापू प्रभु भक्ति में लीन झूम रहे थे वहीं दूसरी ओर पार्क में मौजूद लगभग 50 हजार भक्त गोपिकाएं बने थे, जिससे पूरा माहौल श्रीकृष्ण की रासलीला का सा आभास करा रहा था। दो दिवसीय आसाराम बापू के सत्संग का आयोजन योग वेदांत सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रात:काल सुरेशानंद के कथा वाचन से हुआ। पार्क में सुबह से ही भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ने लगी थी। अपराह्न 1:30 बजे के बाद पहुंचे बापू का भक्तों ने हरी ओम के साथ स्वागत किया। तत्पश्चात बापू व्यास पीठ पर बैठकर भक्तों को जीवन जीने की कला से रूबरू कराया और भगवान श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन किया। उन्होंने ज्ञान गंगा की धारा बहाते हुए कहा कि हरि सम जग कछु वस्तु नहीं, प्रेम पंथ सम पंथ सद्गुरु सम सज्जन नहीं गीता सम नहीं ग्रंथ भगवान के नाम से बढ़कर संसार की कोई कीमती वस्तु नहीं है। भगवान नाम में प्रेम भगवान में प्रीति के समान कोई पंथ नहीं। दुनिया में वस्तु, सुविधा, प्रदान करने वाले सज्जन है लेकिन जनम-मरण के चक्कर से मुक्त कर परमात्मा प्राप्ति करने वाले सद्गुरु के समान कोई सज्जन नहीं है। दुनिया में अनेक मुक्ति का मार्ग बताने वाली भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकली गीता के समान कोई ग्रंथ नहीं है। गीता श्रीकृष्ण के अनुभव की पोथी है। गीता का ज्ञान अद्भुत है। इस दौरान पांडाल में ओम और हरि ओम का उद्घोष गूंजता रहा। यहां समिति के अध्यक्ष आरपी सिंह, बलराम मनवानी, सुरेंद्र कपूर, अनिल अवस्थी, पप्पूअवस्थी और डा. सुनील वानखेड़े आदि थे। ज्ञान तीन प्रकार का होता है : संत आशाराम बापू ने ज्ञान की कुंजियां लुटाते हुए कहा कि ज्ञान तीन प्रकार का होता है। आधिभौतिक ज्ञान, आधिदैविक ज्ञान, आध्यात्मिक ज्ञान। आधिभौतिक से आधिदैविक और आधिदैविक से आध्यात्मिक ज्ञान श्रेष्ठ है। व्यक्ति के पास आधिभौतिक पद-प्रतिष्ठा चाहे कितने भी ऊंचे क्यों न हो पर आध्यात्मिक ज्ञान के बिना उनका कोई महत्व नहीं। आध्यात्मिक में टिके बिना सब दुखों का अंत नहीं हो सकता। जिस प्रभु को मानो वही तुम्हारे है : सत्संग में अमृतपान कराते हुए संत आशाराम बापू ने कहा कि सुख, दुख, बचपन, जवानी, बुढ़ापा आते और जाते है लेकिन जो इन सबको जानने वाला है वह कभी नहीं जाता। वही आत्मा परमात्मा है। वही भगवान है, अकाल पुरुष है। वास्तव में भगवान ही हमारे है। हम अगर श्रीराम को माने तो राम, शिव को माने तो शिव, श्रीकृष्ण को माने तो श्रीकृष्ण। हम जिस भगवान को जितनी श्रद्धा से मानते है भगवान उतना ही हमारे करीब रहते है। भगवान न ही दूर है न ही दुलर्भ, बाद में मिलेंगे ऐसा भी नहीं है। जिसके मुख से श्री हरीनाम निकलता रहता है वह सभी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते है। आशाराम बापू ने सत्संग में बेहतर जीवन जीने की कला से कराया रूबरू

विदेशी भक्त बोले, जीवन हो गया सात्विक

कानपुर (एसएनबी)। बापू के सत्संग में उनके विदेशी भक्त भी मौजूद रहे। इंग्लैड के जेम्स ने कहा कि बापू के साथ रहने का अनुभव बड़ा ही सुखदायी रहा है। वह और उनकी मां बापू को बहुत प्यार करते है। हिंदू धर्म सर्वश्रेष्ठ है। इसी तरह कैलिफोर्निया की सिल्की ने कहा कि जब से वह बापू के साथ जुड़ीं, तब से उनका जीवन ही बदल गया। आध्यात्मिक, धार्मिक उन्नति होने के साथ ही करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से भी वह सुदृढ़ हुई है। वह तामसी जीवन जी रहीं थीं, लेकिन अब सात्विक हो गयी है। रशिया की डेवी भी सत्संग में उपस्थित रहीं।

विदेशी भक्त बोले, जीवन हो गया सात्विक

कानपुर (एसएनबी)। बापू के सत्संग में उनके विदेशी भक्त भी मौजूद रहे। इंग्लैड के जेम्स ने कहा कि बापू के साथ रहने का अनुभव बड़ा ही सुखदायी रहा है। वह और उनकी मां बापू को बहुत प्यार करते है। हिंदू धर्म सर्वश्रेष्ठ है। इसी तरह कैलिफोर्निया की सिल्की ने कहा कि जब से वह बापू के साथ जुड़ीं, तब से उनका जीवन ही बदल गया। आध्यात्मिक, धार्मिक उन्नति होने के साथ ही करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से भी वह सुदृढ़ हुई है। वह तामसी जीवन जी रहीं थीं, लेकिन अब सात्विक हो गयी है। रशिया की डेवी भी सत्संग में उपस्थित रहीं।

 ट्रेन से पहुंचे भक्तों के करीब

कानपुर दिसंबर 20, 2011,मंगलवार

आसाराम बापू ने दी मंत्र दीक्षा, सिखाया योग

 
 

संत का सत्संग

कानपुर (एसएनबी)। संत आसाराम बापू के भक्तों के लिए रविवार का दिन अविस्मरणीय रहा। सर्वप्रथम भक्तों ने बापू से मंत्र दीक्षा ली, तत्पश्चात उनके निर्देशानुसार योग किया। जब ट्रेन से बापू उनके करीब पहुंचे तो वह और भी प्रफुल्लित हो उठे। इस दौरान हरी ओम की जयकार ने पंडाल गुंजायमान रहा। दो दिवसीय सत्संग योग वेदांत सेवा समिति द्वारा शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क में आयोजित हुआ। दूसरे दिन प्रात:काल संत आसाराम बापू ने 25 हजार भक्तों को मंत्र दीक्षा दी, जिसमें करीब 10 हजार विद्यार्थी भी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि सद्गुरु द्वारा प्राप्त मंत्रदीक्षा से 33 प्रकार के आध्यात्मिक लाभ भी सहज में ही होने लगते हैं। साथ ही अगर साधक गुरु द्वारा बताये मार्ग पर संयम से लगा रहे तो वह जीवन के परम लक्ष्य व आत्म-साक्षात्कार को सहज ही प्राप्त कर लेता है। इसलिए जीवन में सद्गुरु की अत्यंत आवश्यकता है। भगवान शिव ने माता पार्वती को वामदेव गुरु से दीक्षा दिलायी। माता काली ने प्रकट होकर गदाधर पुजारी को तोतापुरी गुरु से दीक्षा लेने को कहा और तोतापुरी गुरु की दीक्षा से वे रामकृष्ण परमहंस हो गये। रामकृष्ण परमहंस की दीक्षा ने नरेंद्र को विवेकानन्द बना दिया। बापू ने भक्तों को योग सिखाकर हमेशा स्वस्थ्य बने रहने की सलाह दी। तत्पश्चात वह ट्रेन से भक्तों के करीब पहुंचे व प्रसाद वितरित किया। इस दौरान पंडाल हरि ओम के उद्घोष से गुंजायमान रहा। यहां सुरेशानन्द, समिति के अध्यक्ष आरपी सिंह, बलराम मनवानी, सुरेंद्र कपूर, अनिल अवस्थी, पप्पू अवस्थी, डा. सुनील वानखड़े आदि उपस्थित रहे।

 

 
 

सत्संग कणिकाएं

रात को सोते समय भगवन नाम का जप करें। सुबह उठकर पुन: भगवान का जप करें। ऐसा करने से नींद भक्ति में बदल जाएगी और सुबह सुहावनी हो जाएगी।

बुद्धिशक्ति, मेधाशक्ति के लिए करें नियमित रूप से प्राणायाम। युवा कभी अपने मार्ग से नहीं भटकेंगे।

दक्षिण-पूर्व सिरहाना रखकर सोने से लक्ष्मी और आयु में वृद्धि होती है। उत्तर की ओर सिर रखकर सोने से व्यक्ति हमेशा चिंतित बना रहता है।

विकृत स्वभाव के लोगों को मत्था टेक आसन करना चाहिए।

पुरुष चांदी हाथ में न पहनें। ऐसा करने से शरीर का संतुलन बना रहेगा।

महिलाएं चांदी जरूर पहनें। खासकर पैरों में चांदी की पायल जरूर पहनें। इससे स्त्रियों में होने वाली समस्याओं से वह मुक्त रहेंगी।

युवा माता-पिता का आदर करें, कटु शब्द न कहें, जो युवा माता-पिता को जवाब देते हैं, खीज जाते हैं, वह अधिकतर दुखी रहते हैं।

 

बिना धुएं, बिना बिजली चली ट्रेन

 

सत्संग स्थल पर श्रद्धालुओं को बापू के निकट से दर्शन हों, इसलिए एक विशेष रेल बनायी गयी। पारदर्शी कांच की बनी डिब्बेनुमा यह ट्रेन बिना धुएं, बिना बिजली के पटरियों पर चली। शहर में सत्संग के दौरान बापू के लिए यह ट्रेन पहली बार लगायी गयी, ताकि भक्त नजदीक से बापू से प्रसाद ग्रहण कर सकें।

 

थल बस्तीसे आजीवन रहें स्वस्थ

 

समापन अवसर पर आसाराम बापू ने श्रद्धालुओं व युवाओं को प्राणायाम व योग की विभिन्न विधियां सिखायीं। साथ ही थल बस्ती नामक विशेष प्रयोग करवाया, जिससे शरीर के 134 प्रकार के रोग दूर होते हैं, व्यक्तित्व का विकास होता है। यह वैदिक यौगिक क्रिया आधार स्तंभ है। इससे पेट के सभी रोग दूर होते हैं। व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहता है। उन्होंने कहा कि उछल-कूद करते रहोगे तो हमेशा स्वस्थ्य रहोगे।

 

युवा न करें पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण

 

सत्संग में बापू ने युवाओं और विद्यार्थियों का पथ प्रदर्शन करते हुए कहा कि वह अपनी संस्कृति को न भूलें। पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण न करें, जिसके जीवन में उद्यम, सहस, धर्म, बुद्धि, शक्ति, पराक्रम, यह छह गुण होते हैं, वह हर क्षेत्र में सफल होता है। ब्रrाचर्य सफलता की नीव है। संयम, तत्परता और भगवत कृपा से जीवन को उन्नत करें। भारतीय संस्कृति के अनुसार ऋषि परंपरा से ब्रrाचर्य का पालन करने से व्यक्ति महान बन जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वयं को अबला न समझें क्योंकि ओम स्वरूप शक्तियां सबके अंदर छिपी हुई हैं।

 

आज उरई में होगा सत्संग

 

संत आसाराम बापू का सत्संग सोमवार को जालौन चुंगी के सामने उरई में अपराह्न 2 बजे से होगा। इसकी जानकारी केंद्रीय मीडिया प्रभारी डा. सुनील वानखड़े ने दी।

भगवान में प्रीति करते ही दुख भागता है-आसाराम बापू

Story Update : Monday, December 19, 2011    1:03 AM 

कानपुर। सर्दी में दिनभर धूप में न बैठें। इससे दुख की प्राप्ति होती है। धूप लेनी हो तो सुबह के समय एक घंटे लें। दुख आता है विवेक और वैराग्य जगाने के लिए। दुख से जितना विकास होता है उतना सुख से नहीं। दुख तब तक बना रहता है जब तक दुखी व्यक्ति दुख का सदुपयोग नहीं करता। जब हम दुखियारे भगवान से प्रीति करते हैं तो दुख सदा के लिए चला जाता है। यह प्रवचन रविवार को संत आसाराम बापू ने सेंट्रल पार्क शास्त्री नगर में दिया।

दो दिवसीय प्रवचन के अंतिम दिन उन्होेंने कहा कि दुख मनुष्य की अपनी भूल से आता है। व्यक्ति समझता है कि मुझे किसी दूसरे ने दुख दिया है, लेकिन वह उसी के कर्मों का फल होता है। चाहे सुख हो या दुख सबमें खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। सुख-दुख को थोड़े दिन का मेहमान समझकर सम रहो यानी एकसमान रहो। जो जरा-जरा सी बात में सुखी-दुखी नहीं होता वही सच्चा वीर है। सुख हमारी हिम्मत बढ़ाने आता है। जबकि दुख विवेक और वैराग्य बढ़ाने को आता है।

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जीवन के सूत्र
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घर में गृहकलह होने पर मुखिया रात में एक लोटा जल पलंग के नीचे रखे और सुबह होने पर उसे पीपल, बरगद या नीम पर डाले, इससे शांति बनी रहेगी
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घर में अटैच बाथरूम होने से कई परेशानियां आती हैं।
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चाय-काफी से बचें इसमें दस प्रकार के जहरीले तत्व होते हैं, जरूरी हो तो आयुर्वेदिक चाय लें
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पूर्णिमा, अमावास्या, दीपावली और होली में पति-पत्नी का रिश्ता न निभाएं, अन्यथा विकलांग संतान होगी

मंत्र दीक्षा से 33 आध्यात्मिक लाभ मिलते
कानपुर। सेंट्रल पार्क शास्त्रीनगर में दोपहर में पंडाल के भीतर करीब दस हजार भक्तों ने बैठकर एक साथ संत आसाराम बापू से मंत्र दीक्षा ली। उन्होंने ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जप दस माला रोजाना करने को कहा। यह मंत्र प्रत्येक माला की गुरिया में बोलने को कहा। साथ ही यह बताया कि माला करते समय किसी को माला दिखाई न दे, साथ ही माला शरीर से स्पर्श करती रहे। माला करने से परिवार में खुशहाली और समृद्धि आती है। यदि आप माला जपने के बाद उसे ग्रहण करते हैं तो अल्प मृत्यु जैसी घटना से बचेंगे। माला जपने के बाद उसे पहना जा सकता है। मंत्र दीक्षा के बारे में उन्होंने बताया कि इससे 33 प्रकार के आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

भक्तों की बीच चली बापू की रेल

कानपुर। सत्संग स्थल पर सभी भक्तों को बापू के निकट से दर्शन हो सकें, इसके लिए एक विशेष रेल चलाई गई, जो बिना धुएं, बिना बिजली के पटरियों पर चली। पारदर्शी कांच की बनी रेल में बापू भक्तों के बीच अति निकट पहुंचे और भक्तों पर टाफियों की बरसात की। 

  Comments

Re. : benefits of maala jap @ harish : what are the benefits of maala jap?
Created by Rajesh Kumawat (Gurukripa hi Kevlam) in 12/29/2011 8:38:43 PMFor answer please read Ashram book - Bhagwannam Jap Mahima
Online version:
http://hariomgroup.org/hariombooks/satsang/Hindi/BhagwannamJapMahima.htm

benefits of maala jap
Created by harish in 12/28/2011 1:34:23 AMwhat are the benefits of maala jap?
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Created by Anonymous in 12/27/2011 3:47:12 AMtu hi tu prabhu ji tu hi tu.. hari om hari om
PARUMPITA GURUVAR
Created by BAPUJI KI BHAKT in 12/27/2011 12:57:31 AMhay,.......guruvar maray aap kay shree charno may meera koti-koti naman sewkar ho.
hay guruvar meray aap ki yeh beti aap kay dhura dikshit hai(lucknow)aur may apnay puray parivar ko aap shree se dikshit karana chahuti hu aagay aap shree ki iksha...hay prabhu kya aap shree ke darsan maray lihay dubara sambhu hai........hay prabhu aap sadhay maray shaat rahay ga..............(aap ki bati)

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Created by RAHUL in 12/25/2011 9:21:10 AMbapu is god

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