









मेरठ, 17दिसंबर2011
भैंसाली मैदान में शुक्रवार को संत श्री आसाराम बापू के प्रवचन सुनने को उमड़े श्रद्धालु हाथ उठाकर गुरु को प्रणाम करते हुए और अमृत वचन की रस वर्षा करते बापू। (संबंधित खबर पेज आठ पर)
सफलता का सेतु बनाते हैं दुख और बाधाएं
मेरठ, जागरण संवाददाता : आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता और विख्यात संत श्री आसाराम बापू ने भक्तों को ज्ञान की गंगा में गोते लगवाये। उनके प्रवचन में भक्ति, अध्यात्म, ज्ञान ही नहीं था बल्कि वे दुनियावी पहलू भी थे, जिनसे जूझने में इंसान खुद को असहाय महसूस करता है। हर शब्द में जीने का सार और हर पहेली में जीवन की उलझनें सुलझाने की नसीहत। भक्तों ने भी इस इस दुर्लभ रस का जी भरकर पान किया। मौका था, शुक्रवार को भैंसाली ग्राउंड में सत्संग समारोह का।
प्रथम सत्र में मंच पर पहुंचते ही बापू ने हरिओम का जाप कराया। फिर केबिन से प्रवचन करते हुए कहा, दुखों को हर व्यक्ति बुरा मानता है जबकि सच्चाई यह है कि दुख, विघ्न और बाधाएं तो हमें सीख और संयम देकर सफलता का सेतु बना देते हैं। हमें दुखों को कोसने के बजाय इनका उपकार मानते हुए ऋणी भी रहना चाहिये। कहा कि ऐसा कौन महापुरुष या सफल व्यक्ति रहा, जिसे दुख नहीं मिले। यदि वे मुसीबतों के आगे पस्त हो जाते, तो कभी महान नहीं बन सकते थे। दुख से डरने वाला तो दुख को स्थायी कर लेता है। सुख की कामना और भोग भी ठीक नहीं। संत बोले, ईश्वर प्राप्ति से सरल, सुगम कार्य कोई दूसरा नहीं है। हर काम में श्रम लगता है, लेकिन इसमें श्रम की आवश्यकता नहीं। बोले, श्रद्धा के साथ ज्ञान की भी जरूरत है। आत्मा को पहचानो। बुद्धियोग पैदा करके ईश्वर को बड़ी आसानी से पाया और समझा जा सकता है। हरि-हरि बोल की ध्वनि से पंडाल गूंजता रहा। उन्होंने ओमकार मंत्र की महिमा बताई।
स्वामी सुरेशानंद के भी प्रवचन हुए। इस मौके पर केंद्रीय मीडिया प्रभारी डा. सुनील वानखेड़े, अजय दीवान, राकेश लाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
10 हजार ने ली दीक्षा
दूसरे सत्र में शाम को संत आसाराम ने लगभग 10 हजार लोगों को गुरुमंत्र की दीक्षा दी। माला का जाप कराया और नियमित जाप करने की सलाह दी। इसके बाद आशीर्वाद मंत्र दिया। गुरुमंत्र के जाप के नियम और तरीके भी समझाये।
जब चली गुरुदर्शन एक्सप्रेस
बापू ने विशेष ट्रेन में बैठकर भक्तों को दर्शन दिये। मंच से पंडाल के आखिर तक पटरियों चली इस ट्रेन में बापू विराजमान थे। उन्होंने भक्तों को काजू, बादाम, टॉफी आदि उपहार में दिये। हर भक्त इन्हें पाना चाहता था। पुरुष जमीन पर लेट गये और महिलाओं ने पल्ला फैला दिया।
बापू के वास्ते फूंके 62 करोड़
बापू ने कार्यक्रम के बीच में कहा, टीवी मत देखा करो। टीवी कार्यक्रमों में पैसे देने वालों की प्रशंसा की जाती है, जो नहीं देता उसकी निंदा करते हैं। बोले, बापू का प्रभाव खत्म करने के लिये ही टीवी कार्यक्रमों पर 62 करोड़ रुपया खर्च कर दिया गया, लेकिन इसके बाद तो बापू के भक्त और ज्यादा बढ़ गये। उनका इशारा इलेक्ट्रानिक मीडिया की तरफ था। 100 देशों में सीधा प्रसारण बापू ने बताया कि इस कार्यक्रम का 100 से ज्यादा देशों में सीधा प्रसारण हुआ है।
रूपनारायण ने ली दीक्षा
बापू ने बताया, 80 वर्षीय रूपनारायण के पास अनेक डिग्रियां हैं। आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाने के लिये अब उन्होंने भी मंत्र दीक्षा ली है। भक्तों से उनका परिचय भी कराया। दीवान स्कूल भी पहुंचे बापू दीवान स्कूल पहुंचे। विश्राम किया और कुछ भक्तों से मिले। उन्होंने स्कूल के आनर अजय दीवान, नेहा दीवान, सचिन दीवान, प्रसन्नता दीवान सहित अन्य भक्तों को आशीष दिया। केबिन को लेकर चर्चा बापू जिस केबिन में प्रवचन करते है, उसे लेकर चर्चा रही। कुछ लोग इसे बुलेट प्रूफ बता रहे थे। केंद्रीय मीडिया प्रभारी डा. सुनील वानखेड़े का कहना है कि यह साधारण केबिन धूल आदि से बचाव के लिये है। अंदर, सिर्फ वेंटीलेशन, साउंड आदि व्यवस्था की हुई है।
नियमित दिनचर्या अपनाओ, लंबा जीवन पाओ
मेरठ : बापू बोले, अनियमित दिनचर्या वाले लोग ही डाक्टरों के चक्कर काटते हैं। योग प्राणायाम और आहार-विहार दुरुस्त करके हम लंबे समय तक जी सकते हैं।
बापू का नुस्खा
बापू के बच्चे, कभी नहीं रहते कच्चे
कंकरखेड़ा : आरके पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को आसाराम बापू ने 40 मिनट तक बच्चों को आशीर्वाद दिया। बापू ने स्कूल में प्रवचन दिये और बच्चों को अपने हाथों से प्रसाद भी वितरित किया। स्कूल में आसाराम बापू 40 मिनट ठहरे। 10 मिनट तक स्कूल के भवन को देखा। उसके बाद छात्र-छात्राओं को प्रवचन दिये। उन्होंने बताया कि बापू जी के बच्चे कभी कच्चे नहीं होते। उन्होंने कहा कि जो हम चाहते हैं उसे प्राप्त करना कठिन नहीं है, लेकिन उसे पाने के लिये अपनी धारणा भी ठीक होनी चाहिये। ऊंचे उद्देश्य के लिये ऊंचा आश्रय चुनना चाहिये। तभी हम प्रगति की ओर बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो अपने से बड़ों का सम्मान करते हैं। उन्हें यश, बल, विद्या और बुद्धि हमेशा मिलती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति संत और समाज के बीच सेतु का काम करता है। वह धन्यभागी होता है। इस मौके पर बापू ने दो हजार बारह के कलेंडर व पुस्तकें छात्र-छात्राओं को वितरित कीं। राजीव संगारी, विमल संगारी, राजेश संगारी, वंदना, कविता, चंचल, शिखा व सुरेन्द्र बरनाला मौजूद रहे।