| 24 May 12, Article in Outlook Hindi Monthly Magazine&Daily sandhymahaLakshmi |  | | पक्षियों से जरा सीख लो|उनको आज खाने को है,तो कल का कोई पता नहीं फिर भी पेड की डाली पर गुनगुना लेते है,कोलाहल कर लेते है|कब कहाँ जायेंगे कोई पता नहीं फिर भी निश्चिन्तता से जी लेते है|हमारे पास रहने को घर है,खाने को अन्न है-महीने का,साल भर का|फिर भी दे धमाधम! सामान सौ बरस का पल की खबर नहीं| DetailViews: 21 |
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| 12 May 12, हरिद्वार पूनम दर्शन सत्संग मीडिया कवरेज |  | | मनुष्य की जैसी इच्छा होती है,वैसे कर्म होते है|और मनुष्य जैसे कर्म करता है वैसी ही आगे इच्छा उत्पन्न होती है|इच्छा के मूल में ज्ञान है|जैसे ज्ञान होगा वैसी ही इच्छा और कर्म होते है|राजसी,तामसी ज्ञान से वैसे ही कर्म होते है|लेकिन अध्यात्मिक ज्ञान से मुक्ति मिलती है|सदगुरु की दीक्षा से आत्मसाक्षात्कार होता है|परमात्म प्राप्ति हो जाती है| DetailViews: 1199 |
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| 11 May 12, वसई,पाटन(गुज.) सत्संग मीडिया कवरेज |  | | किसी को सत्संग दिलाना सबसे बड़ी बात है. »तीर्थो में नहाने से एक फल होता है. लेकिन, संत मिले तो चार {धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष} फल होते है. »भगवान के नाम की महिमा बताते हुए बापूजी ने कहा कि » भगवान खुद भी अपने नाम की महिमा नहीं बता सकते.'राम न सके नाम गुण गाही' DetailViews: 455 |
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| 6 May 12, सुलतानपुर, रायबरेली सत्संग मीडिया कवरेज |  | | एकाग्रता से शक्तियां आती हैं। भगवान में प्रीति से रस आता है। एकाग्रता हो और भगवान में प्रीति न हो तो जीवन नीरस हो जाता है। रावण के पास एकाग्रता का बल तो था लेकिन भगवत प्रीति न होने के कारण जीवन नीरस हो गया। सत्संग पर बल देते हुए श्री बापू ने कहा कि सत्संग ही एक ऐसी जगह है जहां पर मनुष्य को सच्चा सुख कैसे और कहां मिलता है।यह पता चल सकता है। सत्संग के बिना जीवन नीरस है। DetailViews: 1037 |
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| 5 May 12, इलाहाबाद (प्रयाग)सत्संग मीडिया कवरेज |  | | शरीर के सात चक्रों के विकास पर व्यक्ति का सर्वंगीण विकास होता है|मूलाधार से लेकर सहस्त्रसार तक सात चक्रों में से आज्ञा चक्र पर ध्यान से पाप ताप नष्ट जाते है| अहंकार विषाद नष्ट हो जाता है|सहस्त्रसार चक्र के ध्यान से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है| सात केंद्र में नीचे के तीन केंद्र पतन के और ऊपर के तीन केंद्र उत्थान के घोतक है| बीच में ह्रदय केंद्र है| DetailViews: 605 |
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