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जीवनी शक्ति - किस वक्त कहाँ

जीवनी शक्ति - किस वक्त कहाँ

P.P.Sant Shri Asharamji Bapu - Nashik 11th Mar' 2013 –Part-1
 
     जो भगवान को कठिन मानते हैं, वैकुण्ठ में मानते हैं, दूर मानते है, वे अपना और भगवान का अपमान करते हैं | जो कभी साथ ना छोड़े, उसका नाम भगवान है  और जो सहज सुलभ है उसका नाम भगवान है और जो हमारे परम हितैषी है उनका नाम भगवान है | जो मरते नही उनका नाम भगवान है, जो बिछड़ते नही उनका नाम भगवान है. जो हम से बेवफाई नही करते उनका नाम भगवान है | शरीर तो बेवफाई करता है, मित्र भी बेवफाई करते हैं, पति-पत्नी भी बेवफाई करते हैं | जब शरीर बेवफाई करता है तो दूसरे तो बेवफाई करते रहते हैं  लेकिन भगवन बेवफाई नही करते | मेरे प्रभुजी, मेरे आत्मदेव कभी मेरे से बेवफाई नही करते | हम भगवान से हज़ार-हज़ार बेवफाई करते रहते है  लेकिन भगवान हमारी बेवफाई को गिनते ही नही, सोचते ही नही, कि अभी बच्चा है  कोई बात नही, अपना है | दूध पिने वाला बच्चा माँ के साथ कितनी बेवफाई करता है | दूध पीते-पीते माँ को काट लेता है  माँ उसको पटक दे तो सिर फुट जाये | बेवफाई करता है तभी भी माँ उसको दूध पिलाती है | डबल-सिंगल कर देता है फिर भी माँ कुछ नही कहती | इससे भी हज़ार गुनी बेवफाई हम भगवान के साथ करते हैं | माँ में भी भगवान का गुण है तभी तो स्वीकार करती है नही तो कहाँ से लाएगी ? ये भगवान का गुण है माँ के अंदर | बेवफाई ना करना ये माँ के अंदर भगवान का गुण है | 
     जिस माँ के लिए माँ बोलते हैं वो सुनती हैं, ऐसी ही भगवान माँ की माँ है और बाप के बाप है | ॐ अर्थात बस वही आई, माझी आई, माँ | इतना निकट है | नही बोलते खाली बोलने का विचार आता है तो  उस सत्ता में भी वही है | जभी भगवन का नाम याद आता है, तो बोलना भगवन याद कर रहे हैं | भगवान का नाम लेने का मन हो तो समझ लेना उन्होंने याद किया है | ऐसा आनंददाई है भगवान, सुखदाई है | अभी अपनी अक्ल, होशियारी से थोड़ी ही बैठे हैं  ये भी तो उनकी कृपा है, बैठे हैं और सोमवती अमावस्या है | ॐ ......... |
 जितना हेत हराम में उतना हरी से होय कह कबीर वह दास का पला ना पकड़े कोई |
ये हरामखोर शरीर में जितना हेत है उतना उस हरि में हो जाये तो बस बेडापार है | ये शरीर हरामखोर है, कितना भी खिलाओ, पिलाओ, घुमाओ, कभी चें कभी में  बुढ़ापे में ऐ |
      आपकी जीवनी शक्ति सारे शरीर में सामान्य है लेकिन हर २ घंटे में एक-एक अंग में उसका विशेष प्रभाव होता है | जिस समय जीवनी शक्ति का जिस अंग में प्रभाव हो, उस समय वो कम करने से शरीर को बहुत बल मिलता है | स्वास्थ्य बढ़ता है, बुद्धि विकसित होती है | जैसे ७-९ जीवनी शक्ति दिमाग में रहती है | उस समय शास्त्र पढ़ लेना, बच्चो की पढ़ाई बच्चे कर  लेवे | याद रखना, दिमागी कम शाम को ७-९ और शाम को ५-७ जीवनी शक्ति पाचन तंत्र में रहती है | ५-७ के बीच भोजन कर लेना चाहिए | ३-५ मूत्राशय में जीवनी शक्ति होती है  उस समय पानी पी लेना चाहिए, १०-१५ मिनट बाद बाथरूम कर लेना चाहिए  और पत्थरी का ऑपरेशन नही करना | पत्थर चट पौधा है कहीं भी पत्थरी हो पत्थरी चट हो जाती है | दो-दो पत्ते खाओ और सूजन भी ठीक हो जाती है | मोच आई हो तो वो भी ठीक हो जाती है | बाई-पास सर्जरी नही कराना | गौ-झरण अर्क २० ग्राम, २० ग्राम पानी डाल के ले लो थोड़े दिन में बलोकेज खुल जायेगा | २५-३० तुलसी के पत्ते का रस, एक नीबू और २ काली मिर्च जैसी सफेद मिर्च होती है उसका पाउडर मिला के थोड़ा चाट लें | गाडा पानी करें जरा-जरा घूँट पियें, बलोकेज खुल जायेगा थोड़े दिनों में | ट्यूमर टूट जायेगा | 
     पला के फूलों को रगड कर गरारे करो तो गला ठीक, और पी लो तो गर्मी छु | अगर फूलों का रस दूध में मिलाके  गर्भनि को पीला दो तो बच्चा केसरिया  और गोंद १ ग्राम मिल जाये तो नामर्द भी मर्द हो जाते हैं  तो मर्द और मजबूत हो जायेगा | पलास के बीज में से कमरकस बनता है | 
बाए नाक से श्वास लो उसमे ॐ भरो,  भगवान हमारे आत्मा हैं  वो हम से दूर नही है , उनको दूर समझने का पाप भोग रहे हैं सब | अब प्रभु आप हमारे हो, दूर नही हो , श्वास दाये से छोड़ो | अब दाये से लो भगवान अब हम आपको दूर नही मानेंगे,  आप हमारे हो , ये मेरी बुद्धि का दिवाला है | आपकी जय कार, ॐ तो आप का खास नाम है | साधना नही करो भगवान को प्यार करो | तुम्हारे हृदय में ख़ुशी झलकेगी | प्यार से जपो आनंद ॐ, ......... | जप की संख्या बढ़ानी नही है, शांति बढ़ानी है, प्रीति बढ़ानी है | 
      सुबह ३-५ तक जीवनी शक्ति फेफड़ों में होती है | तो सुबह-सुबह प्राणायाम कर लेने चाहिए  और ५-७ जीवनी शक्ति बड़े आंत में होती है | इस समय पानी पी लें और शौच का काम निपटा लें | आसन, कसरत और शौच आदि का काम निपटा लें | तो १००-१०० दवाइयाँ खाने से भी पेट की गडबडियां नही जाती , ऐसा करेगा तो पेट ठीक रहेगा | ७-९ जीवनी शक्ति आमाशय में होती है | उस समय थोडा पेय पदार्थ पीना चाहे तो पियें | दूध थोडा हल्का-फुल्का क्योंकि ९-११ के बीच भोजन भी करना है | भोजन और दूध में ढाई घंटे का फर्क होना चाहिए | तो ७-८ के बीच कुछ पेय पी लेवे | ९-११ के बीच भोजन के लिए बहुत उत्तम काल है | ११-१ जीवनी शक्ति हृदय में रहती है उस समय भोजन करेंगे तो हृदय में जो दिव्य गुण विकसित होने चाहिए दया, करुणा, प्रेम, उदारता, प्रसन्नता, अध्यात्मिक समवेदनाए विकसित होनी चाहिए पोषित करने के लिए दोपहर को ११-१ के बीच संध्या भी उसलिये की गयी | 
१-३ छोटी आँत में जीवनी शक्ति होती है  तो जो ११ बजे तक भोजन कर  लिया उसके पोषक तत्व १-३ के बीच छोटी आँत अपने में शोषित करती है और पुरे शरीर को पुष्टि मिलती है | फिर अगर भोजन ही देर से करेगा तो पोषित तत्व कहाँ से मिलेंगे कच्चे तत्व ही मिलेंगे | फिर कमर दुखती है, ये दुखती है | बाकि का कचरा बड़ी आँत में ढकेलती है तो कब्जी भी नही होती | इस समय भोजन करने से दुर्बलता आएगी,  इस समय पानी पी लेवे | ३-५ जीवनी शक्ति मूत्राशय में होती है | उस समय भी पानी पी लें और फिर १०-१५ मिनट बाद पिशाब कर लें, तो पत्थरी की बीमारी आदि नही होगी  और कान भी ठीक रहेंगे |  ५-७ गुर्दे में,  इस समय हल्का भोजन कर सकते हैं | ५-७ के बीच क्योंकि संध्या करना है | जो रात को दूध पीना चाहते हैं उनको हल्का भोजन कर लेना चाहिए ५-७ के बीच में  और ७-९ जीवनी शक्ति मस्तक में रहती है | ध्यान, भजन, शास्त्र अध्यन, पढ़ाई कर लें | ९-११ मेरु-रजु में जीवनी शक्ति रहती है, उस समय ९-११ की नींद सर्वाधिक विश्रांति देती है  और ९-११ के बीच जागते रहे तो थकान-थकान रहेगी | ९-११ के बीच भोजन करेगा तो भी हानि होगी | ११-१ तक पिताशय में जीवनी शक्ति होती है | इस समय नए कोशों का निर्माण होता है, अगर कोई जागेगा ११-१ तक तो नए कोश बनेगे नही | बुड्ढा जल्दी हो जायेगा | पित्त प्रकोपित होगा, अनिद्रा का रोग लगेगा, सिर दर्द, नेत्र रोग आदि होगा  और १-३ यकृत में, लीवर में, जीवनी शक्ति होती है | इस समय संसार का व्यवहार, पति-पत्नी का व्यवहार गहरी हानि करेगा | इस समय गहरी नींद होने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और इस समय गहरी नींद नही किया, और पति-पत्नी के झंझट वाले गप-शप में लगे रहे तो पाचनतंत्र बिगड़ जायेगा, और फिर पति-पत्नी लडेंगें, खूब झगड़ा करेंगें | इस समय जगते रहो तो दृष्टि मंद हो जायेगी, सूझ-बुझ मंद हो जायेगी,  गुस्से वाला शरीर हो जायेगा  और शरीर की प्रतिक्रियाँ मंद होती हैं | इस समय रात को एक्सीडेंट होते हैं | 
        जिसको स्वस्थ होना है वो ९-३ ये ६ घंटे नींद और ध्यान करें | रात को भगवान में सोओगे तो सुबह भगवान से ही उठोगे | जो दुःख में सोते हैं तो दुःख में से ही उठते हैं | चिंता में सोते हैं तो चिंता में से ही उठते हैं | शरीर में सोते हैं तो शरीर से ही उठते हैं | अरे शरीर तो ५ भूतों का है, माया है  मन, बुद्धि, अहंकार, ये सूक्ष्म भूतों का है, ये सूक्ष्म माया है | तो पंचभौतिक शरीर, मन, बुद्धि, अहंकार तो ५ और ३ ८ अष्टदा प्रकृति है | भगवान बोलते हैं, पुण्यों गन्धम प्रिथवियमच, प्रभास्मि शशी सूर्यो | ये ५ भूत पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश और मन, बुद्धि, अहंकार ये अष्टदा प्रकृति है | मैं भिन्न प्रकृति अष्टदा, मैं प्रकृति से भिन्न हूँ | तो भगवान भिन्न हैं तो तुमको क्यों बताते हैं कि  तुम भी भिन्न हो | ममई वान्शो जीवलोके | तुम मेरे वंशज हो | तुम प्रकृति के वंशज नही हो | शरीर प्रकृति का वंशज है | लेकिन आत्मा परमात्मा का वंशज है | आत्मा परमात्मा का वंशज है और बोलते हैं भगवान को पाना कठिन है  कैसी बुद्धि मारी गयी | तरंग बोलती है पानी को मिलना कठिन है | घड़े का आकाश बोलता है महाकाश को मिलना कठिन है | हिंदू बोलता है मनुष्य से मिलना कठिन है | मुसलमान बोलता है बंदे से मिलना कठिन है | ...... अरे पहले मनुष्य है फिर गुजरती, मारवाड़ी... है  पहले भगवान है जो हाजरा-हजुर है | भगवान को छोड़ना कठिन नही असम्भव है और संसार को रखना असम्भव है | शरीर को, संसार को रखना असम्भव है,  आत्मा-परमात्मा को छोड़ना असम्भव है | किसी के बाप की ताकत नही के आत्मा को छोड़ सके | 
कभी आप हाँ में उत्तर नही दे सकते ? क्या आपको गहरी नींद है तो आप हाँ में उत्तर नही दे सकते ? मैं नही हूँ ऐसा बोलेंगे ? नही | भगवान है कि नही ? दुःख है कि नही ? लेकिन मैं तो हूँ उसको जानने वाला, वही तो आत्मदेव है  इतना सरल | ॐ, ॐ, ...... | आनंद स्वरूप, माझा विठल | 
 ॐ, ॐ, ...... | 

 

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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