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आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 7743 Article rating: 4.1
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

मन्त्रजाप के समय कभी ध्यान लगता है कभी इधर उधर भतकता है जो ना सोचने की कोशिश करो वही विचार अधिक आते है इससे बचने की युक्ती बताइये प्रभू?

Admin 0 1218 Article rating: No rating

 मन्त्रजाप के समय कभी ध्यान लगता है कभी इधर उधर भतकता है जो ना सोचने की कोशिश करो वही विचार अधिक आते है इससे बचने की युक्ती बताइय

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 4759 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2834 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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EasyDNNNews

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/ Categories: Rishi Prasad QA

रागरहित होने का क्या उपाय है ?

प्रश्न :- रागरहित होने का क्या उपाय है ? 
पूज्य बापूजी :- रागरहित होने का उपाय है - द्वेषरहित हो। राग - द्वेषरहित होने का उपाय यह है कि सत्य को सत्य जाने और मिथ्या को मिथ्या जाने। सत्य स्वरूप एक परमात्मा है, उसमे प्रीति करे, सत्यस्वरूप का सत्संग सुने। जितना राग कम होगा, उतना ही आदमी बढ़ा बनेगा।


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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 4309 Article rating: 3.4
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