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ईश्वर प्राप्ति का लक्ष्य कैसे पक्का हो ?

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गुरुदेव को सादर नमन,हमे बार-बार भगवान की महिमा सुनने को मिलती है बार बार सत्संग करता हूँ फिर भी भगवान की ईश्वर प्राप्ति का अभी लक्ष्य अभी निर्धारित नही हो पाया, निश्चय नही कर पाया, इसके कारण बताये ?

मन एक ही होते हुए बुद्धि चित्त अहंकार किस प्रकार होता है काहे के लिए होता है ?

Admin 0 2266 Article rating: No rating

  मन एक ही होते हुए बुद्धि चित्त अहंकार किस प्रकार होता है काहे के लिए होता है ? हं !!! मन एक ही होते हुए भी बुद्धि और चित्त अहंकार बनता है  किस प्रकार बनता हैं काहे के लिए ?

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

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Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

नमक : उपकारक व अपकारक भी शरीर की स्थूल से लेकर सूक्ष्मातिसूक्ष्म

नमक : उपकारक व अपकारक भी शरीर की स्थूल से लेकर सूक्ष्मातिसूक्ष्म

सभी क्रियाओं के संचालन में नमक (सोडियम क्लोराइड) महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । कोशिकाओं में स्थित पानी का संतुलन करना, ज्ञानतंतुओं के संदेशों का वहन करना व स्नायुओं को आकुंचन-प्रसरण की शक्ति प्रदान करना ये सोडियम के मुख्य कार्य हैं ।

सामान्यतः एक व्यक्ति के लिए प्रतिदिन

5-6 ग्राम नमक की मात्रा पर्याप्त है । परंतु विश्व स्वास्थ्य संगठन (थकज) के द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 50% व्यक्ति प्रतिदिन 8.7-11.7 ग्राम नमक लेते हैं । दीर्घकाल तक अधिक मात्रा में नमक का सेवन शरीर की सभी क्रियाओं को असंतुलित कर देता है । और आवश्यकता से कम मात्रा में नमक लेने से व्याकुलता, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन), सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों की दुर्बलता, मांसपेशियों की ऐंठन, वमन की इच्छा, वमन, अशांति हो सकती है ।

अधिक नमक के घातक दुष्परिणाम

किसी भी प्रकार के नमक के अधिक सेवन से हानि होती है । संधिवात, जोड़ों की सूजन, गठिया, उच्च रक्तचाप, पथरी, जठर का कैंसर, मूत्रपिंड के रोग, यकृत के रोग, मोटापा और मोटापे से मधुमेह आदि रोग होते हैं ।

नमक खाने के बाद कैल्शियम मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकाला जाता है । जितना नमक अधिक उतना कैल्शियम तेजी से कम होता है । इससे हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं, दाँत जल्दी गिरने लगते हैं तथा बाल सफेद होकर झड़ने

लगते हैं । अधिक नमक स्नायुओं को शिथिल करता व त्वचा पर झुर्रियाँ लाता है । ज्यादा नमक खानेवाले व्यक्ति जल्दी थक जाते हैं । अधिक नमक ज्ञानतंतुओं व आँखों को क्षति पहुँचाता है ।

इससे दृष्टिपटल क्षतिग्रस्त होकर दृष्टि मंद हो जाती है । नमक की तीक्ष्णता से शुक्रधातु पतला होकर स्वप्नदोष, शीघ्र पतन व पुंसत्वनाश होता है । अम्लपित्त, अधिक मासिकस्राव, एक्जिमा, दाद, गंजापन व पुराने त्वचा-रोगों का एक प्रमुख कारण नमक का अधिक सेवन भी है । अकाल वार्धक्य को रोकनेवाली आयुर्वेदोक्त रसायन-चिकित्सा में नमक बिना के आहार की योजना की जाती है ।

अधिक नमक से हृदयरोग

आवश्यकता से अधिक नमक खाने पर उसे फीका करने के लिए शरीर अधिक पानी का उपयोग करता है । इससे जलीय अंश का संतुलन बिगड़कर रक्तदाब बढ़ जाता है,

जो हृदयरोग उत्पन्न करता है । ‘साइंटिफिक एडवायजरी कमेटी ऑन न्यूट्रीशन’ तथा 2003 में इंग्लैंड में किये गये शोध के अनुसार अतिरिक्त नमक से हृदय का आकार बढ़ जाता है ।

अधिक नमक का मन पर प्रभाव

नमक सप्तधातुओं में निहित ओज को क्षीण कर देता है । ओजक्षय के कारण मनुष्य भयभीत व चिंतित रहता है । उसकी शारीरिक व मानसिक क्लेश सहने की क्षमता घट जाती है ।

नमक के अति सेवन से कैसे बचें ?

भोजन बनाते समय ध्यान रखें कि भोजन स्वादिष्ट हो पर चरपरा नहीं । अधिकतर पदार्थों में सोडियम प्राकृतिक रूप से ही उपस्थित होता है, फलों व सब्जियों में विशेष रूप से पाया जाता है । अतः सब्जियों में नमक कम डालें । सलाद आदि में नमक की आवश्यकता नहीं होती । चावल व रोटी बिना नमक की ही बनानी चाहिए । अपनी संस्कृति में भोजन में ऊपर से नमक मिलाने की प्रथा नहीं है । वैज्ञानिकों का भी कहना है कि शरीर अन्न के साथ घुले-मिले नमक का ही उपयोग करता है । ऊपर से डाला गया नमक शरीर में अपक्व अवस्था में चला जाता है । चिप्स, पॉपकॉर्न, चाट आदि व्यंजनों में ऊपर से डाला गया नमक कई दुष्परिणाम उत्पन्न करता है । दीर्घकाल तक सुरक्षित रखने के लिए अत्यधिक नमक डाल के बनाये गये पदार्थ, जैसे - फास्टफूड, अचार, चटनी, मुरब्बे, पापड़, केचप्स आदि का सेवन स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है ।

सप्ताह में एक दिन, खासकर रविवार को बिना नमक का भोजन करना शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए खूब लाभदायी है । गर्मियों में व पित्त-प्रकृतिवाले व्यक्तियों को तथा पित्तजन्य रोगों में नमक कम खाना चाहिए । परिश्रमियों की अपेक्षा सुखासीन व्यक्तियों को नमक की जरूरत कम होती है ।

चैत्र महीने में 15 दिन बिना नमक का भोजन अर्थात् ‘अलोना व्रत’ करने से त्वचा, हृदय, गुर्दे के विकार नहीं होते, वर्षभर बुखार नहीं आता । इन दिनों सुबह नीम के फूलों का 20 मि.ली. रस पीने से अथवा नीम के 10-15 कोपलें और 1-2 काली मिर्च मिश्री या शहद के साथ लेने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है । 

नमक कौन-सा खायें ?

आयुर्वेद के अनुसार सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ है । लाखों वर्ष पुराना समुद्री नमक जो पृथ्वी की गहराई में दबकर पत्थर बन जाता है, वही सेंधा नमक है । यह रुचिकर, स्वास्थ्यप्रद व आँखों के लिए हितकर है ।

सेंधा नमक के लाभ

आधुनिक आयोडीनयुक्त नमक से सेंधा नमक श्रेष्ठ है । यह कोशिकाओं के द्वारा सरलता से अवशोषित किया जाता है । शरीर में जो 84 प्राकृतिक खनिज तत्त्व होते हैं, वे सब इसमें पाये जाते हैं ।

(1) शरीर में जल-स्तर का नियमन करता है, जिससे शरीर की क्रियाओं में मदद मिलती है ।

(2) रक्तमें शर्करा के प्रमाण को स्वास्थ्य के अनुरूप रखता है ।

(3) पाचन संस्थान में पचे हुए तत्त्वों के अवशोषण में मदद करता है ।

(4) श्वसन तंत्र के कार्यों में मदद करता है और उसे स्वस्थ रखता है ।

(5) साइनस की पीड़ा को कम करता है ।

(6) मांसपेशियों की ऐंठन को कम करता है ।

(7) अस्थियों को मजबूत करता है ।

(8) स्वास्थ्यप्रद प्राकृतिक नींद लेने में मदद करता है ।

(9) पानी के साथ यह रक्तचाप के नियमन के लिए आवश्यक है ।

(10) मूत्रपिंड व पित्ताशय की पथरी रोकने में रासायनिक नमक की अपेक्षा अधिक उपयोगी ।  

समुद्री नमक के लाभ

यह समुद्र से प्राकृतिक रूप में प्राप्त होता है, इसलिए इसमें शरीर के स्वास्थ्य के लिए जरूरी 80 से अधिक खनिज तत्त्व मौजूद रहते हैं । यह बाजारू आयोडीनयुक्त नमक से बहुत सस्ता व अधिक लाभदायक है ।

(1) रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है, जिससे सर्दी, फ्लू, एलर्जी आदि रोगों से रक्षा होती है ।

(2) कई जानलेवा बीमारियों से बचाता है ।

(3) समुद्री नमक आपका वजन कम करने में भी सहयोग देता है । यह पाचक रसों के निर्माण में मदद करता है, जिससे आहार का पाचन शीघ्र होता है । यह कब्ज को दूर करता है ।

(4) यह दमा के रोगियों को लाभप्रद है ।

(5) यह नमक मांसपेशियों की ऐंठन और दर्द को रोकने में मददरूप होता है ।

(6) पानी के साथ समुद्री नमक लेने से कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण कम होता है और उच्च रक्तचाप को यह कम करता है तथा अनियमित दिल की धड़कनों को नियमित करता है । इस प्रकार यह दिल के दौरे और हृदयाघात को रोकने में मदद करता है । यह शरीर में शर्करा का प्रमाण बनाये रखने में मदद करता है, जिससे इंसुलिन की आवश्यकता को कम करता है । अतः मधुमेह के रोगियों के आहार में यह अनिवार्य रूप से होना चाहिए ।

मानसिक अवसाद : तनाव का सामना करने के लिए आवश्यक हार्मोन्स सेरोटोनिन और मेलाटोनिन को शरीर में बनाये रखने में मदद करता है । इससे हम अवसाद एवं तनाव से मुक्त रहते हैं और अच्छी नींद आती है ।   

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