प्रश्नोत्तरी

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आध्यात्मिक

तात्त्विक

आत्मस्वरूप निष्क्रिय, अव्यक्त और तृप्त होते हुए भी वृत्तियों से कैसे जुड़ जाता है ?

Admin 0 10301 Article rating: 1.0

आत्मस्वरूप निष्क्रिय, अव्यक्त और तृप्त होते हुए भी वृत्तियों से कैसे जुड़ जाता है ? आत्मा तो निष्क्रिय है, अव्यक्त है और तृप्त है, फिर वृत्तियों से कैसे जुड़ जाता है ? न जुड़े इसका कोई उपाय बताने की कृपा करो |

ईश्वर सब में है फिर भी सब में नहीं ?

Admin 0 3744 Article rating: No rating

 हरि ॐ गुरूजी कृष्ण भगवान ने जो है  भागवत गीता में कहा है की मैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु आकाश में प्रवेश होते हुए भी  प्रवेश नहीं हूँ मतलब उसमें प्रवेश हूँ और प्रवेश होते हुए भी प्रवेश नहीं हूँ| इसका जो है थोड़ा समझाइये?

गुरुदेव हम चाहते हैं कि आत्मज्ञान प्राप्त हो ?

Admin 0 8634 Article rating: No rating

   पूज्य गुरुदेव के चरणों में सादर प्रणाम, गुरुदेव हम चाहते हैं कि  आत्मज्ञान प्राप्त हो| इसके उपर हमारे ऊपर कृपा करे कि ताकि हम उस ओर अग्रसर हो सके|

ईश्वर प्राप्ति का लक्ष्य कैसे पक्का हो ?

Admin 0 4314 Article rating: 2.0

गुरुदेव को सादर नमन,हमे बार-बार भगवान की महिमा सुनने को मिलती है बार बार सत्संग करता हूँ फिर भी भगवान की ईश्वर प्राप्ति का अभी लक्ष्य अभी निर्धारित नही हो पाया, निश्चय नही कर पाया, इसके कारण बताये ?

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 464 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 4711 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2796 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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EasyDNNNews

गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

Admin 0 7241 Article rating: 4.2
1 दिसंबर 2010
निरंतर अंक - 216

गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन में संशय उत्पन्न हो जाता है

Admin 0 4856 Article rating: 4.3
1 जनवरी 2011
अंक - 217
प्रश्न :- गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन मे संशय उत्पन्न हो जाता है। 
पूज्य बापूजी :- सब कुछ क्या जानते है ?
प्रश्नकर्ता :- जैसे कोई सही चीज हो तो उसके विषय मे मन में द्वंद उत्पन्न होने लगता है कि यह ऐसा है कि ऐसा है ?



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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 4258 Article rating: 3.4
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