प्रश्नोत्तरी

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आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 7733 Article rating: 4.1
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 465 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 4739 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2817 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

Admin 0 7317 Article rating: 4.2
1 दिसंबर 2010
निरंतर अंक - 216

गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन में संशय उत्पन्न हो जाता है

Admin 0 4906 Article rating: 4.3
1 जनवरी 2011
अंक - 217
प्रश्न :- गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन मे संशय उत्पन्न हो जाता है। 
पूज्य बापूजी :- सब कुछ क्या जानते है ?
प्रश्नकर्ता :- जैसे कोई सही चीज हो तो उसके विषय मे मन में द्वंद उत्पन्न होने लगता है कि यह ऐसा है कि ऐसा है ?



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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

Admin
/ Categories: QA with other saints

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

पूज्य बापूजी - ये सब कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा
अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है।   

श्री सुरेशानंदजी - 1 अनुभव नहीं, कई प्रकार के अनुभव साधकों को होते है ।  सांसारिक इच्छायें जो पहले इतना
सताती थी, आकर्षित करती थी, वो नहीं होती है। समता बढ़ रही है ।  गीता में जो बताया – नेहाभिक्रम नाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते। स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्॥ —श्रीमद्भगवद्गीता २/४० समता रूपी धर्म का थोड़ा सा भी पालन किया जाये, स्वल्पमप्यस्य भगवान कहते हैं, तो त्रायते महतो भयात, तो
महान भय से रक्षा हो जाती है।  साधकों के दिल में वो भी समता का सद्गुण भी बढ़ रहा है, विकार कम हो रहे है,
नाम जप में रस आता है,अच्छा लगता है और आँखों से प्रेम भक्ति के आंसू बहते है, वो तो जब बापूजी पधारे और
जब बापूजी ने हम सब साधकों के लिए दिल का जो भाव , बापूजी ने कहा न हम शब्दों में नहीं वर्णन कर सकते, तब
मैं तो नीचे बैठा था, पर मेरा दिल कहता है की यहाँ बैठे हजारों सत्संगियों की आँखे गीली हो गयी थी।  हृदय भाव से
भर आया था । 
पूज्य बापूजी - चलो ये बात तो ठीक है हम खंडन नही करते, शास्त्रीय बात है। लेकिन हम अब ठीक जगे है, ईश्वर के
रस्ते ठीक चल रहे है, उसका प्रमाण है - 
जाने जीव तब जागा, हरी पद रूचि विषय विलास विरागा । 
तो ये आपका उत्तर और शास्त्र बिलकुल मेल की बात ।  
आप अपना हृदय के साक्षी हो।  विषय विलास विकार में जो पहले रस आता था वो अगर उससे जायदा आता है या
वैसा ही आता है तो आप अध्यात्मिकता में  आगे नहीं हो। विकारी सुख फिक्का पड़ रहा है।  सत्संग, सेव, साधन का
सुख हृदय में जगमगाने लगा है तो समझो आप ऊँचाई के रस्ते पर हो ।
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