प्रश्नोत्तरी

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आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 7515 Article rating: 4.0
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 463 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 4582 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2768 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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/ Categories: PA-000195-Diet

तक्र (छाछ)

 दूध में जोरन (थोड़ा दही) डालने से दही के जीवाणु बड़ी तेजी से बढ़ने लगते हैं और वह दूध 4-5 घंटों में ही जमकर दही बन जाता है। दही में पानी डालकर मथने पर मक्खन अलग करने से वह छाछ बनता है। छाछ न ज्यादा पतली होती हो, न ज्यादा गाढ़ी। ऐसी छाछ दही से ज्यादा गुणकारी होती है। यह रस में मधुर, खट्टी-कसैली होती है और गुण में हलकी, गरम तथा ग्राही होती है।

छाछ अपने गरम गुणों, कसैली, मधुर, और पचने में हलकी होने के कारण कफनाशक और वातनाशक होती है। पचने के बाद इसका विपाक मधुर होने से पित्तप्रकोप नहीं करती।

भोजनान्ते पिबेत् तक्रं वैद्यस्य किं प्रयोजनम्।

भोजन के उपरान्त छाछ पीने पर वैद्य की क्या आवश्यकता है?

छाछ भूख बढ़ाती है और पाचन शक्ति ठीक करती है। यह शरीर और हृदय को बल देने वाली तथा तृप्तिकर है। कफरोग, वायुविकृति एवं अग्निमांद्य में इसका सेवन हितकर है। वातजन्य विकारों में छाछ में पीपर (पिप्ली चूर्ण) व सेंधा नमक मिलाकर कफ-विकृति में अजवायन, सोंठ, काली मिर्च, पीपर व सेंधा नमक मिलाकर तथा पित्तज विकारों में जीरा व मिश्री मिलाकर छाछ का सेवन करना लाभदायी है। संग्रहणी व अर्श में सोंठ, काली मिर्च और पीपर समभाग लेकर बनाये गये 1 ग्राम चूर्ण को 200 मि.ली. छाछ के साथ लें।

सावधानीः मूर्च्छा, भ्रम, दाह, रक्तपित्त व उरःक्षत (छाती का घाव या पीड़ा) विकारों में छाछ का प्रयोग नहीं करना चाहिए। गर्मियों में छाछ नहीं पीनी चाहिए। यदि पीनी हो तो अजवायन, जीरा और मिश्री डालकर पियें।

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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 4096 Article rating: 3.5
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