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आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 6525 Article rating: 3.8
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 444 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 3970 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2538 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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/ Categories: Rishi Prasad QA

गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

पूज्य बापूजी :- सब जगह अद्वैत ब्रम्हा है, ऐसी भावना करनी चाहिए लेकिन गुरुदेव के साथ अद्वैत की भावना नही करनी चाहिए क्योंकि अद्वैत मतलब 'सबमे मैं ही हूँ।' गुरु के साथ अद्वैत की भावना करोगे तो शिष्टाचार को धक्का लगेगा। इसमें शास्त्र वचन है : 
या  पर्यंत जीवेत् त्रयो वंद्य:
ईश्वरो गुरुर्वेदांतश्च। 
जब तक जिये तब तक ईश्वर, गुरु और वेदांत - तीनो को आदर से देखे, तीनो वंदनीय है। गुरु से अद्वैत भाव करोगे, शिष्टाचार नही रखोगे तो गुरु के हृदय में तुम्हारे लिए अहोभाव कैसे झलकेगा ? मैं अगर गुरुदेव के साथ अहोभाव-आदरभाव नही रखता, अद्वैतभाव करता तो कही का न रहता। कितनी कृपा है वेद -शास्त्रो की ! सब जगह अद्वैत भाव करो तो राग द्वेष मिटेगा लेकिन गुरु के साथ अद्वैतभाव करोगे तो उच्छ्रंखल हो जाओगे। तो यह शास्त्र की कृपा है कि हमको उच्छ्रंखल होने से बचाता है।
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 3260 Article rating: 4.5
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