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आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 7295 Article rating: 4.0
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 462 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 4408 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2723 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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/ Categories: Rishi Prasad QA

गुरुदेव ! ईश्वर की तरफ जाने की छटपटाहट तो मन मे है पर मन की चंचलता नही जाती। ऐसे में क्या करे कि ईश्वर की तरफ बढ़ चले ?

पूज्य बापूजी :- चंचलता नही जाती तो न जाय ! भगवान से कहो : 'महाराज ! चंचलता तो मन की है, हम तो तुम्हारे है।' मन की चंचलता नही जाती....इस चिंता में पड़ो ही नही। चंचलता मिटाने में लगोगे तो मन और कूदेगा। चंचल है तो उसकी दिशा बदल दो ! नाचे तो नाच भगवान के लिए। गाये तो गा भगवान के लिए। रोये तो रो भगवान के लिए। भागे संसार मे तो भाग भगवान के लिए। 'लेकिन बाबा क्या करे ! मन संसार के लिए ही भागता है।' तो भागने दे संसार के लिए और सोच 'मेरा क्या है, मैं तो भगवान का हूँ और भगवान मेरे है।' आप भगवान के हो जाओ, फिर मन संसार के लिए भाग भाग कर थक जाएगा। फ्यूज निकाल दोगे तो पँखा घूम-घूम कर रुक जाएगा। आप भगवान के हो जाओ। एकदम सरल तरीका है। बाकी तो मन को रोकने बैठोगे तो हमारा ही नही रुकता तो तुम्हारे को कैसे बताऊँगा, सीधी बात है !
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Next Article गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 3875 Article rating: 3.5
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