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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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ध्यान विषयक

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गुरुदेव ! ईश्वर की तरफ जाने की छटपटाहट तो मन मे है पर मन की चंचलता नही जाती। ऐसे में क्या करे कि ईश्वर की तरफ बढ़ चले ?

पूज्य बापूजी :- चंचलता नही जाती तो न जाय ! भगवान से कहो : 'महाराज ! चंचलता तो मन की है, हम तो तुम्हारे है।' मन की चंचलता नही जाती....इस चिंता में पड़ो ही नही। चंचलता मिटाने में लगोगे तो मन और कूदेगा। चंचल है तो उसकी दिशा बदल दो ! नाचे तो नाच भगवान के लिए। गाये तो गा भगवान के लिए। रोये तो रो भगवान के लिए। भागे संसार मे तो भाग भगवान के लिए। 'लेकिन बाबा क्या करे ! मन संसार के लिए ही भागता है।' तो भागने दे संसार के लिए और सोच 'मेरा क्या है, मैं तो भगवान का हूँ और भगवान मेरे है।' आप भगवान के हो जाओ, फिर मन संसार के लिए भाग भाग कर थक जाएगा। फ्यूज निकाल दोगे तो पँखा घूम-घूम कर रुक जाएगा। आप भगवान के हो जाओ। एकदम सरल तरीका है। बाकी तो मन को रोकने बैठोगे तो हमारा ही नही रुकता तो तुम्हारे को कैसे बताऊँगा, सीधी बात है !
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

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