प्रश्नोत्तरी

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आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 9203 Article rating: 4.3
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

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Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 6095 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

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ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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EasyDNNNews

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/ Categories: Rishi Prasad QA

प्रश्न :- हे गुरुवर ! कामनारहित गुरुभक्ति कैसे करे ? मन में कोई कामना न रहै और आपसे प्रीति हो जाये।

पूज्य बापूजी :- भगवान को पाने की कामना रखने से दूसरी कामनाएँ चट (खत्म) हो जाती है। भगवान को पाने की कामना, कामना नही गिनी जाती है, तो हो गए कामना रहित। 
         आपसे प्रीति कैसे करे ? तो हमको आप क्या मानते है ? दाढ़ी वाले बाबा इधर बैठे है - ऐसा मान के प्रीति करेंगे ? इधर घुसेंगे,चिपकेंगे - इसका नाम प्रीति है क्या ? मेरे पैर दबायेंगे अथवा मेरे को कुछ खिलाएंगे - इसको प्रीति बोलते है तो आपको वहम है। आप मेरे 'मैं'  को प्रीति करिये। मेरा 'मैं' तो चिद् वपु (चैतन्य शरीर) विभु व्याप्त है। अर्थात आप अपने - आपको प्रीति करेंगे तो मुझे ही करेंगे। आप अपने आप को प्यार करिये 'मैं सुखस्वरूप हूँ, चेतनस्वरूप हूँ, अमर हूँ। दुःख से, चिंताओं से, भय से, कल्पनाओ से मेरा कुछ लेना देना नही है।' ऐसा करके अपने को प्रीति करिये तो आपने मेरे को कर ली प्रीति। यदि मेरे को इस रूप में मानो तो अपने को प्रीति हो गयी क्योंकि तुम और हम आकृति से दो दिखते है, बाकी एक ही तत्व है हम सब।
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 5923 Article rating: 3.5
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