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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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गुरुदेव ! ये इच्छा-वासनाएँ कैसे मिटे और परम पद को कैसे पायें ?

प्रश्न :- गुरुदेव ! ये इक्छा-वासनाएँ कैसे मिटे और परम पद को कैसे पायें ?
पूज्य बापूजी :- इक्छा ही तो जीव को भटकाती है। इक्छाओ को मिटाने के लिए मूलबंध करके, होठ बन्द करके भगवन्नाम का जप करे। ऐसा रोज 5-7 बार करे तो भगवान मदद करेंगे। अपने सुख के लिए दूसरे का उत्पीड़न न करने का मन मे निश्चय कर ले। अपने सुख के लिए जो भी चेष्टाएँ करेंगे उनसे इक्छाये बढ़ेंगी। इक्छा की दिशा बदल दो कि उत्पीडन, भोग और दूसरे की वस्तु लेने के बदले देने का का रुख बनाऊँगा, संसार के काम आऊँगा।' 'मैं फलाना हूँ' - ऐसी मान्यता छोड़ दे। मन मे निश्चय करे कि 'आज मैं दूसरों की पीड़ा हटाने की चेष्टा करूँगा। दूसरों के काम आऊँगा। अपने स्वार्थ के बदले दूसरे की सेवा में अपने तन को, मन को, बुद्धि को लगाऊँगा। ' ऐसा करके इक्छाये भागने लगेगी। 
     'बुद्धिदाता ! मेरा यह संकल्प तेरी कृपा से फलेगा। अब मैं संसार के काम आऊँगा, धर्म के काम आऊँगा, परपीड़ा हरण के काम आऊँगा। विषय-विलास की खाई में तबाह होने के बदले संयम, सादगी और सेवा के सद्गुण से सम्पन्न बनूँगा।' ऐसा दृढ़ संकल्प कर इक्छाओ का नाश करे और अनिच्छित परमात्म-पद में विश्रांति पायें।
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

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