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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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बापूजी ! आपके सेवा में सदा रूचि रहें ,यही में चाहता हूँ

बापूजी ! आपके सेवा में सदा रूचि रहें ,यही में चाहता हूँ ।

पूज्य बापूजी : तो मेरी सेवा क्या है ,ये पहचान लो । मेरी कौनसी सेवा में रूचि बने रहे ! मेरी कौनसी सेवा में रूचि बने रहे ! मेरी रुचि बने रहे ,ये सवाल ही ,ये इच्छा ही गलत है । रूचि को तो छोडो । मेरी कोई रूचि न रहे । सेवा की रूचि बनेगी तो भोग की रूचि से बचने के लिए सेवा के रूचि अच्छी है । विकारों के रूचि से बचने के लिए ,सेवा की रूचि अच्छी है । लेकिन बाद में रूचि तो रूचि है । चलो ! आगे चलो !

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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

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