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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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ध्यान विषयक

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/ Categories: PA-000444-Meditation

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

साधक : श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?
  
    पूज्य बापूजी : निद्रा का व्यवधान क्यों होता है ! ये शरीर में थकान होती है तो निद्रा का व्यवधान होता है ,अथवा तो भीतर का रस नही मिलता तो व्यवधान होता है । तो इसमें निद्रा ठीक ले लो ,नही तो थोड़ी निद्रा आती है तो डरो मत, निद्रा के बाद फिर शांत हो जाओ । व्यवधान नही हैं फिर निद्रा भी चिंतन करते करते थोड़ा निद्रा में चले गए ,थकान मिटेगा तो फिर चिंतन में चले आओ। इतना परिश्रम नही करो की साधन में बैठते ही निद्रा आजाये और इतना जागो मत की निद्रा की कमी रहे और उतनी निद्रा कम मत करो । इतनी निद्रा ज्यादा मत करो की मन में शांत होने का समय न मिले । ठीक से नींद करो ,ठीक से ध्यान भजन का समय निकालो और रूचि भगवान में होगी प्रीती तो निद्रा नही आयेगी और थकान होगी तो निद्रा आयेगी । थकान भी ना हो और थकान में निद्रा आती है तो अच्छा ही है । स्वास्थ्य के लिए ठीक ही है ।
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

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