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पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

 पूज्य बापूजी :- कटहल काटना होता है तो हाथ में तेल चुपड़कर काटते है ताकि उसका दूध चिपके नही, नही तो हाथ से जल्दी उतरता नही है। ऐसे ही संसार का व्यवहार करो तो भगवद्भ भक्ति, ध्यान, जप आदि की चिकनाई हृदय में चुपड़कर फिर संसार में आओ ताकि संसार न चिपके और तुम्हारा काम भी हो जाए। 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

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कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

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