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हरि ॐ ! मन एक होते हुए भी बुद्धि,चित्, अहंकार किस प्रकार होते हैं ,कायके लिए होता है ?

 पूज्य बापूजी : देखो ! इस चैतन्य में संकल्प-विकल्प उठा तो मन बन गया , निश्चय हुआ तो वही बुद्धि बनगया ,चैतन्य हुए तो उसको चित् बोला गया । और किसी शरीर में अथवा परिस्थिति में 'मैं ' हुआ तो अहंकार बनगया ,यही वृत्ति होती है वृत्ति । उसको कलना भी बोलते हैं ,संबित भी बोलते हैं ,फुरना भी बोलते हैं । ये संकल्प- विकल्प वाला फुरना,वृत्ति,संबित ,मन निर्णयात्मक हुआ तो बुद्धि ; चिंतानात्म हुआ तो चित् ; अहमात्मक हुआ तो अहंकार ।
       जय हो ! जय हो !
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

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