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माया का स्वरुप क्या है और माया से कैसे बचना चाहिए ?

साधक: माया का स्वरुप क्या है और माया से कैसे बचना चाहिए ?
    
 पूज्य बापूजी : माया जो दिखे पर टिके नही,ये माया का स्वरुप है । जो बदल जाता है । 
माया से कैसे बचना चाहिये ? जो दिखता है वह  सपना है और परमात्मा अपना है । परमात्मा को प्राप्ति करने की इच्छा से माया से बचता है । भगवान की शरण ह्रदय पुर्बक जाने से माया से वचते हैं ।
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