प्रश्नोत्तरी

परिप्रश्नेन विडियो

1 2 3 4 5

आध्यात्मिक

Admin
/ Categories: PA-000437-Q&A

काम, क्रोध, लोभ में आकर मैंने कई अयोग्य व्यवहार किये है। क्या मुझे ईश्वर प्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी :- पहले जो गलती की , पाप किया उसके लिए बन्द कमरे में भगवान के आगे रोकर माफी माँग लो और दोबारा न करने का दृढ़ संकल्प करो। और पुकारो
     ' दीन दयाल बिरिदु संभारी। 
       हरहु नाथ मम संकट भारी।। 
हे प्रभु ! रजोगुण, तमोगुण के माहौल में फिसलाहट होती है, रक्षा करो मुझे बचाओ। प्रतिदिन गलती न करने का संकल्प दोहराओ। सुबह गहरा श्वास लेकर ॐकार का दीर्घ जप करो। अपनी उस गलती को सामने लाकर भगवान की कृपा की गदा लगा दो फिर शांत हो जाओ। भगवान के बल से रक्षित, पोषित होने से अब यह गलती नही करेंगे। और मैंने गलती की नही, गलती तो मन ने, शरीर ने, बुद्धि में की। मैं तो परमात्मा का, परमात्मा मेरे। अपने में गलती मानोगे और निकालोगे तो मेहनत ज्यादा पड़ेगी। मन, इंद्रियों द्वारा गलती दोबारा नही होगी - ऐसा प्रयत्न करके अपने को भगवान में शांत करते जाओ तो आपका बल बढ़ जाएगा, फिर बुद्धि आपको नही घसीटेगी। आप बुद्धि को ठीक करने जाओगे तो मन, इन्द्रियाँ आपको घसीटेगी। साधक के जीवन में यह बड़ी लड़ाई आ जाती है, फिसलाहट आ जाती है, सफल होने पर अहंकार आ जाता है। अहंकार आते ही 'जरा इतना खा लिया, जरा यह कर लिया तो क्या फर्क पड़ता है !'  फिर फिसलने लग जाता है। ऐसी स्थिति में सावधान रहें। 
साँच बराबर तप नही, झूठ बराबर पाप। 
जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप।। 
सत्य का आश्रय ले तो जल्दी ईश्वरप्राप्ति होगी।
Previous Article क्या गृहस्थी बहने ईश्वरप्राप्ति के लिए ॐकार की १२० माला कर सकती है ?
Print
8952 Rate this article:
3.8
Please login or register to post comments.

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 8084 Article rating: 4.3
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
RSS
1234

आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 469 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

RSS
135678910Last

ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 5074 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2934 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

RSS

EasyDNNNews

गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

Admin 0 7881 Article rating: 4.3
1 दिसंबर 2010
निरंतर अंक - 216

गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन में संशय उत्पन्न हो जाता है

Admin 0 5311 Article rating: 4.3
1 जनवरी 2011
अंक - 217
प्रश्न :- गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन मे संशय उत्पन्न हो जाता है। 
पूज्य बापूजी :- सब कुछ क्या जानते है ?
प्रश्नकर्ता :- जैसे कोई सही चीज हो तो उसके विषय मे मन में द्वंद उत्पन्न होने लगता है कि यह ऐसा है कि ऐसा है ?



RSS
123

Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 4729 Article rating: 3.2
RSS
12