प्रश्नोत्तरी

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आध्यात्मिक

Admin
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भगवन ! हर घट में आपका दर्शन कैसे हो और हर शासों में आपके सुमिरन कैसे प्राप्त हो ?

साधक : भगवन ! हर घट में आपका दर्शन कैसे हो और हर शासों में आपके सुमिरन कैसे प्राप्त हो ?
  
    पूज्य बापूजी : हर घट में हमार दर्शन ,हर घट में हम कैसे घुसे दिखें , हमारे आकृति के दर्शन चाहते हो की हमारे दर्शन चाहते हो ? बोले आपका दर्शन ; बापूजी दिखें, बापूजी दिखें,बापूजी दिखें ,ऐसे प्यारे प्यारे दाढ़ीवाले दिखे ; ये तो तुम्हारा भावना का दर्शन हुआ और तत्व रूप में तो हर घट में मेरे में जो चैतन्य आत्मा है ,जो सबमें है, आप मान लो - सत्संग करके जान लो । दिखेगा तो दिखनेवाले हर घट में ; भगवान या बापूजी या इष्टजी दिखें और दुशरे देखनेवाले । लेकिन वास्तव में जो देखनेवाला है वो असली रूप में तुम क्या हो ,इसको जान लोगे तो तो फिर हर घट,मरघट सब ठीक हो जायेगा । हर घट में बापूजी का दर्शन कौन चाहता है उसको खोज लो ,तो हो जायेगा सबका ।
   जय हो ! जय हो ! बापूजी के जय हो !!!
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तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 7540 Article rating: 4.1
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 463 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 4602 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2770 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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EasyDNNNews

गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

Admin 0 7015 Article rating: 4.2
1 दिसंबर 2010
निरंतर अंक - 216

गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन में संशय उत्पन्न हो जाता है

Admin 0 4682 Article rating: 4.3
1 जनवरी 2011
अंक - 217
प्रश्न :- गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन मे संशय उत्पन्न हो जाता है। 
पूज्य बापूजी :- सब कुछ क्या जानते है ?
प्रश्नकर्ता :- जैसे कोई सही चीज हो तो उसके विषय मे मन में द्वंद उत्पन्न होने लगता है कि यह ऐसा है कि ऐसा है ?



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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 4122 Article rating: 3.5
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