प्रश्नोत्तरी

परिप्रश्नेन विडियो

1 2 3 4 5

आध्यात्मिक

Admin
/ Categories: PA-000437-Q&A

बापूजी ! आपके सेवा में सदा रूचि रहें ,यही में चाहता हूँ

बापूजी ! आपके सेवा में सदा रूचि रहें ,यही में चाहता हूँ ।

पूज्य बापूजी : तो मेरी सेवा क्या है ,ये पहचान लो । मेरी कौनसी सेवा में रूचि बने रहे ! मेरी कौनसी सेवा में रूचि बने रहे ! मेरी रुचि बने रहे ,ये सवाल ही ,ये इच्छा ही गलत है । रूचि को तो छोडो । मेरी कोई रूचि न रहे । सेवा की रूचि बनेगी तो भोग की रूचि से बचने के लिए सेवा के रूचि अच्छी है । विकारों के रूचि से बचने के लिए ,सेवा की रूचि अच्छी है । लेकिन बाद में रूचि तो रूचि है । चलो ! आगे चलो !

Previous Article मुक्ति और आत्म-साक्षात्कार एक ही है कि अलग अलग है ?
Next Article भगवन ! हर घट में आपका दर्शन कैसे हो और हर शासों में आपके सुमिरन कैसे प्राप्त हो ?
Print
3551 Rate this article:
No rating
Please login or register to post comments.

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 7553 Article rating: 4.1
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
RSS
1234

आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 463 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

RSS
1345678910Last

ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 4606 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 2770 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

RSS

EasyDNNNews

गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

Admin 0 7030 Article rating: 4.2
1 दिसंबर 2010
निरंतर अंक - 216

गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन में संशय उत्पन्न हो जाता है

Admin 0 4702 Article rating: 4.3
1 जनवरी 2011
अंक - 217
प्रश्न :- गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन मे संशय उत्पन्न हो जाता है। 
पूज्य बापूजी :- सब कुछ क्या जानते है ?
प्रश्नकर्ता :- जैसे कोई सही चीज हो तो उसके विषय मे मन में द्वंद उत्पन्न होने लगता है कि यह ऐसा है कि ऐसा है ?



RSS
123

Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 4131 Article rating: 3.5
RSS
12