Pujya Gurudev has saved our money and ornaments from theft
17 May 12
गुरु देव, आपका कोटि कोटि आभार !!
मैं 23 अप्रैल 12 को परिवार के साथ शादी में जा रहा था. रास्ते में बस बदली किया. बस को चलने में थोड़ा समय था. मैंने पत्नी एवं बेटे को बस में बिठाया व स्वयं मिठाई लेने चला गया. हमारे पास एक सूटकेस था जिस में हमारे कपड़े, गहने एवं Rs. 40,000 के नए नोट थे. चूँकि बस में थोड़ा भीड़ थी और सूटकेस को बीच रास्ते में रखने से रास्ता रुकता था. जब मैं मिठाई लेने गया था, तो दो लड़के, जो स्थानीय मालूम नहीं पड़ते थे, ने मेरी पत्नी को बता कर सूटकेस रास्ते से उठा कर अगले दरवाजे के साथ सीट के पीछे रख दिया. मैं मिठाई ले कर आया तो दरवाजे के पास ही खड़ा हो गया. बाद कुछ और सवारी आयीं तो इन लड़कों ने हमें अन्दर आगे बढ़ा दिया पर आप वहीँ जमें रहे. 10 मिनिट में बाद एक औरत उतरी तो उसने जोर से दरवाजा बंद कर दिया जिस से दरवाजे के साथ मेरे सूटकेस से सट कर खड़े लड़के का अंगूठा उस मैं आ गया और खून निकल आया. मैंने उस लड़के को आगे ला कर सीट दिलाई व खून निकल रहे अंगूठे पर रूमाल बांध लेने को कहा. बाद में वह हमसे पिछले स्टाप पर उतर गया. घर जा कर रात को जब पत्नी ने सूटकेस खोला तो सूटकेस अन्दर से फटा पाया. मेरी पत्नी अवाक रह गयी. उसने तुरंत मुझे बुलाया. मेरा माथा ठनका. मैंने उसे तुरंत पैसे व गहने चेक करने को कहा. देखा तो गहने व पैसे सुरक्षित थे. हमने चैन की सांस ली. फिर सोचा कि ऐसा कैसे हुआ तो समझते देर नहीं लगी. जो लड़के ने हमारा सूटकेस आगे दरवाजे के साथ रखा था वह उस से सट कर खड़ा था. उसने सूटकेस के ऊपर के पाकेट का जिप खोल कर अन्दर ब्लेड से सूटकेस चीरा और उस का हाथ सूटकेस के अन्दर पहुँच गया था. ऊपर के पाकेट में लोक कल्याण सेतु पत्रिका पत्नी ने राखी थी. चोर का हाथ पहले उस पर पड़ा होगा. हो सकता है कि गुरु जी ने चोर को चेतावनी स्वरुप कुछ आभास दिया होगा, पर वह जब नहीं रुका तो उसे सजा भी दे दी. इस प्रकार गुरुदेव ने हमारे सामान की रक्षा की. हमारा हृदय गुरुदेव के प्रति आभार से झुक गया. जब गुरुदेव अपने भक्तों के सामान की भी इतनी रक्षा करते हैं तो बे भक्तों पर कोई आंच कैसे आने दे सकते हैं ?. गुरु देव आपका कोटि कोटि आभार.
बलदेव राज धीमान, मो. 9768617889