हरि ॐ, गुरुमंत्र के जप से व्यक्ति की जन्मकुंडली में विभिन्न स्थानों की शुद्धि होती है और अनेक लाभ प्राप्त होते हैं जो इस प्रकार हैं- 1 करोड़ जपः तन स्थान की शुद्धि, रज-तम नाश, सत्त्ववृद्धि, रोग बीज नाश, शुभ स्वप्न, स्वप्न में संत देव दर्शन, वार्ता। 2 करोड़ जपः धन स्थान, कुटुम्ब स्थान शुद्धि, धनप्राप्ति, कुटुम्ब स्थान शुद्धि, धनप्राप्ति, कुटुम्ब वियोग-संयोग, सुखवृद्धि। 3 करोड़ जपः सहज स्थान शुद्धि, असाध्य कार्य साध्य, सभी का प्रेम प्राप्त। 4 करोड़ जपः सुख स्थान शुद्धि, शरीर और मन के आघात कम। 5 करोड़ जपः पुत्र स्थान-विद्या स्थान शुद्धि, अपुत्रवान को पुत्र, पुत्रवान के पुत्र का अच्छे घर संबंध, अविद्वान को विद्या, बुद्धिशक्ति जाग्रत, धारणाशक्ति, ग्रहणशक्ति वृद्धि। 6 करोड़ जपः शत्रुस्थान शुद्धि, शत्रु व रोग नाश। 7 करोड़ जपः स्त्री स्थान शुद्धि, विवाह न हो तो विवाह, दंपत्ति अनुकूल। 8 करोड़ जपः मृत्यु स्थान शुद्धि, अकाल मृत्यु नहीं। 9 करोड़ जपः धर्म स्थान शुद्धि, धन स्थान शुद्धि, मंत्रदेव-सगुण। 10 करोड़ जपः कर्म स्थान शुद्धि, दुष्कर्म नाश, सत्कर्म। 11 करोड़ जपः आय स्थान शुद्धि, धन, गृह, भूमि लाभ, सत्त्ववृद्धि। 12 करोड़ जपः व्यय स्थान शुद्धि, अनीतिमय व्यय बंद। रज-तम पूर्ण नाश, स्वप्न या प्रत्यक्ष गुरुकृपा, कृतकृत्य।
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