Pujya Asaram Bapu Daily Darshan 12th May 2013 विपरीत से विपरीत परिस्थिति भी आये तब भी धर्म को न छोड़ो, धैर्य को न छोड़ो, ईर्ष्या-द्वेष से प्रेरित होकर, उतावलेपन में एवं घबराकर कोई कदम न उठाओ। यह धृति ही धर्म है। मान लो कि व्यापार में कुछ नुकसान हो गया तो उससे घबराकर कोई दूसरा कदम न उठाओ, नहीं तो ज्यादा नुकसान कर बैठोगे। जो नुकसान हुआ उसे धैर्यपूर्वक सहन कर लो एवं सोच विचारकर धीरजपूर्वक निर्णय करके आगे बढ़ो। यह धृति है, धर्म है।

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