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Jab Hum Sote The
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Jab Hum Sote The


ऐ मेरे सद्गुरु प्यारे, तू दे रहा कैसा इशारा?!
जैसे तू ब्रह्म में स्थित है, ऐसा हो बोध हमारा...
जब हम बैठे थे सुखों में, तू सुखा रहा था तन को |
जब हम बैठे थे घरों में, तू भुला रहा था मन को  |
जग में रह कर सब भूला, न भोजन चाहा न पानी ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
वो कैसी राते होंगी, प्रभु-प्रेम में जब तू रोया  |
दुनिया थी नींद में सोती, तू भर-भर प्याले रोया ||
तेरी महिमा न जाए बखानी...
तेरे तन-मन-धन की तपस्या तेरे जीवन की क़ुरबानी...
नगर-सेठ कहलाने वाला, गुरु-दर पर मरता मिटता |
तेरी मर्ज़ी पूरण हो, ये ध्यान हृदय में धरता |
बस निराकार ने थामा, न होने दी कुछ हानि ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
गुरु दर पर सेवा करते, हाथों से खून था निकलता |
पर गुरु-सेवा में तत्पर, इस देह का भान था भूलता ||
गुरु-आज्ञा प्रथम निभानी...
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
गुरु अपने का संग करके, उनके वचनों को कमाया |
कभी पर्वत कभी गुफा में, जा-जा कर ध्यान लगाया |
बस गुरु कृपा है पानी, बस गुरु कृपा है पानी ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
माँ का आँचल बिसराया, पत्नी का प्रेम ठुकराया |
किन-किन राहों पर चलकर, इस ब्रह्मज्ञान को पाया |
फिर आतम में ही रहा तू, 40 दिन की वो निशानी ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
था आसोज सुद 2 दिन, और संवत बीस-इक्कीस |
मध्याह्न ढाई बजे, मिल गया इश से इश |
पानी में मिल गया पानी, फिर दोनों हो गए भानी ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
ये रौशनी कैसी फूटी, जग गयी है सारी धरती |
अम्बर भी प्रकाश से फूटा, नस-नस में ज्योति भर दी |
सब जड़ और चेतन जागा, लगे संत की बात सुहानी ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
गुरु सत्य का रस पिलाया, तन-मन-हृदय में समाया |
हर नस-नस में पहुँचा वो, हर रूह को “ॐ” जपाया |
वो रस मेरी आँखों से छलके, गुरु-प्रेम का बन कर पानी ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
हर तरफ है आतम दर्शन, हर तरफ है नूर-नूरानी |
हर तरफ है तेरा उजाला, हर तरफ है तू ब्रह्मज्ञानी |
है आज की तेरी कहानी...
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
दरिद्रनारायण की सेवा करते, हैं अपना आप लुटाया |
गली-गली गाँव में जाकर, सबको ही “ॐ” जपाया ||
भारत का रत्न नूरानी...
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
हम ना भूलें उस तप को, कैसे तूने गुरु को रिझाया |
किन-किन राहों पे चलकर, इस ब्रह्मज्ञान को पाया |
तेरी शान न जाए बखानी, दुनिया है तेरी दीवानी ||
तेरे तन-मन-धन की तपस्या, तेरे जीवन की क़ुरबानी...
तेरे जीवन की क़ुरबानी, तेरी महिमा न जाए बखानी...
भारत का रत्न नूरानी....
ऐ मेरे सद्गुरु प्यारे, तू दे रहा कैसा इशारा?!
जैसे तू ब्रह्म में स्थित है, ऐसा हो बोध हमारा...


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