Mahashivratri Jap Anushthan Registration

महाशिवरात्रि के निमित्त पूज्य बापूजी के उत्तम स्वास्थ्य हेतु महामृत्यंजय मंत्र का सामुहिक जपानुष्ठान

(21 फरवरी, 2020) 

इस वर्ष भी पूज्य गुरुदेव के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घ आयु व शीघ्र कारागार रिहाई के निमित्त साधकों के द्वारा 21 फरवरी (महाशिवरात्रि) धर्मराज मंत्र व महामृत्युंजय मंत्र का जपानुष्ठान करने का आयोजन किया जा रहा है ।

सभी साधक नीचे दिये गये संकल्प का विनियोग करके प्रतिदिन धर्मराज मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र एवं ॐ ॐ ॐ बापू जल्दी बाहर आयें   सुबह 7:20 बजे से जप करें ।

संभव हो तो स्थानीय आश्रमों में, सत्संग भवन में अथवा किसी साधक के  घर में सामुहिकररूप से जप करें ।

यदि संभव ना हो तो प्रत्येक साधक अपने-अपने घर पर भी कर सकते हैं ।

यदि सुबह 7:20 बजे जप न कर सकें तो दिन में कभी भी कर सकते हैं । 

इन दिनों में हो सके तो अनुष्ठान के नियमों का यथासंभव पालन करें ।

आश्रम से प्रकाशित ‘मंत्रजाप महिमा एवं अनुष्ठान विधि’ पुस्तक का सहयोग ले सकते हैं ।

                      उत्तम स्वास्थ्य प्रदायक एवं समस्त पत्ति विनाशक धर्मराज मंत्र

विनियोग : अस्य श्री धर्मराज मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः गायत्री छन्दः शमन देवता अस्माकं

सद् गुरु देवस्य संत श्री आशारामजी महाराजस्य

उत्तम स्वास्थ्यर्थे सकल आपद् विनाशनार्थे च जपे विनियोगः । 

धर्मराज मंत्र :-  क्रौं ह्रीं आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहकृते नमः ।

महामृत्युंजय मंत्र विनियोग :- ॐ अस्य श्री महामृत्युंजय मंत्रस्य वशिष्ठ ऋषिः

अनुष्टुप् छंदः श्री महामृत्युंजय रुद्रो देवता, हौं बीजं, जूँ शक्तिः, सः कीलकम्, 

श्री आशारामजी सदगुरुदेवस्य आयुः आरोग्यः यशः कीर्तिः पुष्टिः वृद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।

मंत्र : ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।। ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ

पूज्य बापूजी के शीघ्र आश्रम आगमन हेतु:

ॐ ॐ ॐ बापू जल्दी बाहर आयें 

            इस जपानुष्ठान में स्वयं भाग लें  तथा औरों को भी  प्रेरित करें ।

महाशिव रात्रि व्रत, जागरण , शिव पूजन - 21 फरवरी 2020

निशीथ काल :  रात्रि 12 - 27  से 1 - 17 तक

प्रथम प्रहर: शाम 6: 39 से 
द्वितीय प्रहर : रात्रि 9: 46  से
तृतीय प्रहर : मध्य रात्रि 12: 52 से
चतुर्थ प्रहर: 22 फरवरी प्रात-  3:59 से

शिवरात्रि की रात 'ॐ नमः शिवाय' जप

शिवजी का पत्रम-पुष्पम् से पूजन करके मन से मन का संतोष करें, फिर ॐ नमः शिवाय.... ॐ नमः शिवाय.... शांति से जप करते गये। इस जप का बड़ा भारी महत्त्व है। अमुक मंत्र की अमुक प्रकार की रात्रि को शांत अवस्था में, जब वायुवेग न हो आप सौ माला जप करते हैं तो आपको कुछ-न-कुछ दिव्य अनुभव होंगे।

ॐ नमः शिवाय मंत्र विनियोग: 

अथ ॐ नमः शिवाय मंत्र। वामदेव ऋषिः। पंक्तिः छंदः। शिवो देवता। ॐ बीजम्। नमः शक्तिः। शिवाय कीलकम्। अर्थात् ॐ नमः शिवाय का कीलक है 'शिवाय', 'नमः' है शक्ति, ॐ है बीज... हम इस उद्देश्य से (मन ही मन अपना उद्देश्य बोलें) शिवजी का मंत्र जप रहे हैं – ऐसा संकल्प करके जप किया जाय तो उसी संकल्प की पूर्ति में मंत्र की शक्ति काम देगी।

जिन महिलाओं को शिव रात्रि के दिन मासिक धर्म आ गया हो वे  ॐ सहित नमः शिवाय नही जपे सिर्फ शिव.... शिव.... शिव.... शिव...मानसिक जप करें ,माला आसान के उपयोग भी न करें ।

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आपके जीवन में शिव-ही-शिव हो

(पूज्य बापूजी की कल्याणमयी मधुमय वाणी)

चार महारात्रियाँ हैं  जन्माष्टमी, होली, दिवाली और शिवरात्रि | शिवरात्रि को अहोरात्रि भी बोलते हैं । इस दिन ग्रह नक्षत्रों आदि का ऐसा मेल होता है कि हमारा मन नीचे के केन्द्रों से ऊपर आये । देखना, सुनना, चखना, सूँघना व स्पर्श करना इस विकारी जीवन में तो जीव-जंतु भी होशियार हैं । बकरा जितना काम विकार में होशियार है, उतना मनुष्य नहीं हो सकता । बकरा एक दिन में चालीस बकरियों के साथ काला मुँह कर सकता है, मनुष्य करे तो मर जाय । यह विकार भोगने के लिए तो बकरा, सुअर, खरगोश और कई नीच योनियाँ हैं । विकार भोगने के लिए तुम्हारा जन्म नहीं हुआ है ।

विकारी शरीरों की परम्परा में आते हुए भी निर्विकार नारायण का आनंद-माधुर्य पाकर अपने शिवस्वरूप को जगाने के लिए शिवरात्रि आ जाती है कि ‘लो भाई ! तुम उठाओ इस मौके का फायदा....।’

शिवजी कहते हैं कि 'मैं बड़े-बड़े तपों से, 

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