Mahashivratri Jap Anushthan Registration

महाशिवरात्रि के निमित्त पूज्य बापूजी के उत्तम स्वास्थ्य हेतु महामृत्यंजय मंत्र का सामुहिक जपानुष्ठान

(4 मार्च, 2019)

 

इस वर्ष भी पूज्य गुरुदेव के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घ आयु व शीघ्र कारागार रिहाई के निमित्त साधकों के द्वारा 4 मार्च (महाशिवरात्रि) 

धर्मराज मंत्र व महामृत्युंजय मंत्र का जपानुष्ठान करने का आयोजन किया जा रहा है ।

सभी साधक नीचे दिये गये संकल्प का विनियोग करके प्रतिदिन धर्मराज मंत्र की 2 माला तथा महामृत्युंजय मंत्र की 1  माला सुबह 7:30 बजे से जप करें ।

संभव हो तो स्थानीय आश्रमों में, सत्संग भवन में अथवा किसी साधक के  घर में सामुहिकररूप से जप करें ।

यदि संभव ना हो तो प्रत्येक साधक अपने-अपने घर पर भी कर सकते हैं ।

यदि सुबह 7:30 बजे जप न कर सकें तो दिन में कभी भी कर सकते हैं ।

इन दिनों में हो सके तो अनुष्ठान के नियमों का यथासंभव पालन करें ।

आश्रम से प्रकाशित ‘मंत्रजाप महिमा एवं अनुष्ठान विधि’ पुस्तक का सहयोग ले सकते हैं ।

                      उत्तम स्वास्थ्य प्रदायक एवं समस्त पत्ति विनाशक धर्मराज मंत्र

विनियोग : अस्य श्री धर्मराज मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः गायत्री छन्दः शमन देवता अस्माकं

सद् गुरु देवस्य संत श्री आशारामजी महाराजस्य

उत्तम स्वास्थ्यर्थे सकल आपद् विनाशनार्थे च जपे विनियोगः । 

धर्मराज मंत्र :-  क्रौं ह्रीं आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहकृते नमः ।

महामृत्युंजय मंत्र विनियोग :- ॐ अस्य श्री महामृत्युंजय मंत्रस्य वशिष्ठ ऋषिः

अनुष्टुप् छंदः श्री महामृत्युंजय रुद्रो देवता, हौं बीजं, जूँ शक्तिः, सः कीलकम्, 

श्री आशारामजी सदगुरुदेवस्य आयुः आरोग्यः यशः कीर्तिः पुष्टिः वृद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।

मंत्र : ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।। ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ

            इस जपानुष्ठान में भाग लेने के इच्छुक साधक रजिस्ट्रेशन अवश्य करें तथा औरों से भी  करवायें ।

 इस हेतु मोबाइल द्वारा https://goo.gl/forms/ZewF33gcqQ5MT1lQ2  स लिंक पर भी ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन करें |

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Admin

Why do we celebrate Shivratri

'The fourteenth lunar day of the dark fortnight of the month of Falguna is a dark auspicious night known as Shivaratri it is the unique occasion when the stars and planets are conducive to the union of the individual consciousness of the jiva with the Supreme Consciousness of Shiva and thus aid in the realization of their essential unity so Mahashivaratri is a night of supreme beneficence. Jap, austerities and fast done on this day earn a thousand times more religious merits compared to that accrued from the same effort exerted on any other day.

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