आध्यात्मिक होली के रंग रंगे

होली हुई तब जानिये, पिचकारी गुरुज्ञान की लगे |

सब रंग कच्चे जाय उड़, एक रंग पक्के में रंगे |  

पक्का रंग क्या है ? पक्का रंग है ‘हम आत्मा है’ और ‘हम दु:खी है, हम सुखी है, हम अमुक जाति के है ....’ - यह सब कच्चा रंग है | यह मन पर लगता है लेकिन इसको जाननेवाला साक्षी चैतन्य का पक्का रंग है | एक बार उस रंग में रँग गये तो फिर विषयों का रंग जीव पर कतई नहीं चढ़ सकता |

‘Holi is celebrated in the real sense when you get sprinkled with the colour of Guru’s Knowledge. 
All other colours should fade out and the fast colour (of non-duality) should remain.’ 

Which is the fast colour? ‘I am Atman’ is the fast colour and ‘I am happy; I am unhappy; I am so and so; I am of so and so, I am Patel’ are fading colours. These fading colours dye the mound but the witness to the mind is Pure Consciousness. It is the fast colour. Once one is dyed in that colour, one is never dyed or influenced by the colours of sensual pleasures.

Holi Videos


होली पर्व निमित्त प्रचार सामग्री

होली निमित्त प्रचार सामग्री इस लिंक पर उपलब्ध है |
डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लीक करें -

Holi Audios



होली के बाद स्वास्थ्य Health after Holi

Admin

होलिकोत्सव में पूज्यश्री का उद्‌बोधन

"मोटर चाहे जितनी सुन्दर हो,मजबूत हो किन्तु अगर ब्रेक न हो तो वह निरर्थक है । उसी तरह जीवन में व्रत,नियम,संयम आवश्यक है । संयमी के जीवन में दीक्षा फलित होती है । गुरु की दीक्षा उसीके जीवन में शीघ्र सुमधुर फल देती है । दीक्षा में जीवन की दिशा मिलती है । जीवन में कुशलता आती है । उसमे श्रद्धा और श्रद्धा से सत्य की प्राप्ति होती है ।"

    तापी के तट पर होली के पर्व प्रसंग पर आयोजित शिविर के दूसरे दिन देश विदेश से आये हुए हज़ारों साधक तथा जाहिर जनता की बहुत बड़ी सभा को संबोधित करते हुए पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू ने कहा कि :

    "अनदेखी वस्तु या व्यक्ति पर विश्वास करना यह श्रद्धा है । जिसके जीवन में श्रद्धा है ; वह श्रद्धा उसके ह्रदय को रसाल,ज्ञाननिष्ठ,प्रेमी और कोमल बनाती है और ह्रदय में परमात्मा को प्रगट कराती है । श्रद्धा पापी को निष्पाप, नास्तिक को आस्तिक, अभक्त को भक्त, दुराचारी को सदाचारी, निर्बल को बलबान तथा जिज्ञासु को आत्मसाक्ष्यात्कार करा देती है । जिसके जीवन में श्रद्धा नहीं उसके जीवन में संयम भी नहीं होता । संयमहीन मानव कुछ सफलता प्राप्त भी कर ले तब भी अहंकार में फूल कर अपने सर्वनाश को निमंत्रित करता है । जिसके जीवन में श्रद्धा नहीं है उसके जीवन में दक्षता भी नहीं है ।"

    देश-विदेश में हरिनाम-कीर्तन की गंगा बहानेवाले, लाखों लोगों के ह्रदय में परम भक्ति जगानेवाले और समुद्र पार के देशों में भी भारतीय संस्कृति तथा वेदान्त विद्या की दुंदुभि बजानेवाले जीवन्मुक्त पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू ने आगे कहा : 

    "संसार के विषयों में थोड़ा सुखाभास होता है,रस आता है किन्तु इस रस से विकारों को उत्तेजन मिलता है, बुद्धि,तेज, बल, स्वास्थ्य नष्ट होता है जबकि भगवद् ध्यान से बल,बुद्धि,तेज,स्वास्थ्य का विकास होता है । हरिनाम भवरोग मिटाने की औषधि है एबं भगवद्प्रेम जगाने का साधन है ।"

    सचमुच परमात्मा,शास्त्र,संत की प्रेरणा-आज्ञा अनुसार चलनेवाला अंधश्रद्धालु नहीं है किन्तु अपने मन रूपी सेवक की बात मान कर गलत मार्ग पर चलनेवाला अंधश्रद्धालु है ।

   जब तक मनुष्य स्वयं शान्त, समचित्त नहीं हो सकता तब तक दूसरे को शान्ति नहीं दे सकता । जो स्वयं भ्रमित,दुःखी, उद्विग्न हो वह दूसरे को सुख,निश्चिन्तता किस तरह दे सकता है ? समाज में सुधार करना हो तो पहले अपने में सुधार करो । प्रत्येक  व्यक्ति अपना कल्याण करेगा तब समूचे समाज का कल्याण होगा । अपना व्यबहार ऐसा शुद्ध रखो की जिससे अनीति का धन अपने घर में न आये । दूसरे को सुख प्राप्त हो, अन्य के चित्त में प्रसन्नता बनी रहे ऐसी मधुर वाणी बोलो ।

जगत भगत का मेल नहीं होता । आप साधना करें तो आपकी पत्नी आपको भगवद् मार्ग पर चलने से रोकेगी । पत्नी को उसका पति रोकेगा । यदि दोनों भगवान के मार्ग पर चलेंगे तब कुटुम्ब के लोग कहेंगे कि ये दोनों पागल हो गए हैं । यदि सारा  कुटुम्ब भगवान के रास्ते आगे बढ़ेगा तो पास पड़ोस के लोग कहेंगे कि यह सारा कुटुम्ब पागल हो गया है । दूसरे का सुनकर अपना दिव्य मार्ग छोड़ना नहीं । अपने मार्ग पर आगे ही आगे बढ़ते जाओ । मार्ग के बिघ्न धीरे-धीरे समाप्त हो जायेंगे । सारा विश्व संकल्पमय है । आप परमात्मा-प्राप्ति का संकल्प दृढ रखें । संसार का सभी आपके अनुकूल होने लगेगा । जो लोग आपको रोकते थे वे ही आपकी प्रशंसा करेंगे । वे ही आपके पास से शुभेच्छा माँगेंगे ।"

 

जगत भगत का मेल नहीं होता । आप साधना करें तो आपकी पत्नी आपको भगवद् मार्ग पर चलने से रोकेगी । पत्नी को उसका पति रोकेगा । यदि दोनों भगवान के मार्ग पर चलेंगे तब कुटुम्ब के लोग कहेंगे कि ये दोनों पागल हो गए हैं । यदि सारा  कुटुम्ब भगवान के रास्ते आगे बढ़ेगा तो पास पड़ोस के लोग कहेंगे कि यह सारा कुटुम्ब पागल हो गया है । दूसरे का सुनकर अपना दिव्य मार्ग छोड़ना नहीं । अपने मार्ग पर आगे ही आगे बढ़ते जाओ । मार्ग के बिघ्न धीरे-धीरे समाप्त हो जायेंगे । सारा विश्व संकल्पमय है । आप परमात्मा-प्राप्ति का संकल्प दृढ रखें । संसार का सभी आपके अनुकूल होने लगेगा । जो लोग आपको रोकते थे वे ही आपकी प्रशंसा करेंगे । वे ही आपके पास से शुभेच्छा माँगेंगे ।"

" होली यह मात्र कंडे लकड़ी के ढेरों को जलाने का त्यौहार नहीं है l यह तो साथ साथ चित्त की दुर्बलता दूर करने का, मन की मलीन वासनाओं को जलने का पवित्र दिन है l आज के दिन से विलासी वासनाओं का त्याग करके परमात्मा  प्रेम , सद्भावना , सहानुभूति,इष्ट निष्ठा,निर्भयता , स्वधर्मपालन ,करुणा , दया, अहिंसा आदि दैवीगुणों का अपने जीवन में विकास करना चाहए l भक्त प्रह्लाद जैसी दृढ़ इश्वरनिष्ठा  ,सहनशीलता, प्रभु प्रेम, क्षमाशील , करुणा ,दया , अहिंसा आदि दैवी गुनका आह्वान करना चाहिए l "


"होली का रंग तो कपड़ो तो रंगता है l आप हरि के रंग से अपने हृदय को रंगना l  होली का त्यौहार निसर्ग का त्यौहार है , वसंत का उत्सव है नए अन्न का उत्सव होली के साथ जुड़ा  हुआ है l आज के दिन से खाजूर का त्याग करना चाहिए l होली की परिक्रमा करने से कफ़ पिघलता है हम निरोगी बनते हैं |

आजके दिन सत्य, शांति, परमेश्वरीय प्रेम , दृढ़ता की विजयी होती है l हिरण्यकशिपु  की आसुरी वृत्ति का पराभव , होलिका रूपी कपट के पराजय का दिन यह होली l  जो भक्त परम पुरुष परमात्मा में दृढ़ निष्ठावान है ; उनके आगे प्रकृति अपना नियम बदलती है l अग्नि उन्हें जला नहीं  सकती l पानी उन्हें डूबा नही सकता l हिंसक पशु उनके मित्र बन जाते है l समस्त प्रकृति उनकी दासी बनती है उनके अनुकूल बनती है l उनकी यादाश्त दिलानेवाले यह होली का पवित्र दिन है l  मानव को विघ्न बाधाओ  के बीच भी प्रहलाद की तरह भगवननिष्ठा टिकाये रखकर संसार से पार होने का सन्देश देनेवाला यह दिन है l 

ऋषि प्रसाद मई  १९९२  अंक ६ 

Previous Article परमात्मारूपी रंगरेज की प्रीति जगाने का उत्सव : होलिकोत्सव
Print
32650 Rate this article:
3.7
Please login or register to post comments.

Holi Articles

RSS
12