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वर्षा ऋतु की विशेष : - अभी वर्षा ऋतु है | इसे शास्त्रीय भाषा में आदानकाल बोलते है | जठराग्नि दुर्बल होती है | वायु, गैस की तकलीफें उभरती है | पित्त संचित होता है | अगर सावधान नहीं रहें तो पित्त व वात मिलकर हार्ट अटैक बना सकता है | इस आदानकाल में कब्जियत न रहे इसका ध्यान रखना चाहिए | करने योग्य :- १) पेट साफ़ रहे इसके लिए हरड़ रसायन २ -२ गोली खाना | हरड रसायन , रसायन से बना हुआ टोनिक है । दिनभर खाया हुआ टोनिक बन जायेगा | २) शुद्ध वातावरण व शुद्ध जल का सेवन करना | ३) मधुर भोजन, चिकनाईवाला, शरीर को बल देनेवाला भोजन करना चाहिये और दोपहर के भोजन में नींबू, अदरक, सैंधा नमक, लौकी, मैथी, खीरा, तुरई आदि खाने चाहिए | ४) वर्षाऋतु में पानी गरम करके पीयें अथवा तो पानी की शुद्धता का ध्यान रखे | ५) वायुप्रकोप से जोडों मे दर्द बनने की संभावना है और बुढ़ापे में लकवा मारने की संभावना बढ़ जाती है | भोजन में लहसुन की छौंक लकवे से फाईट करता है | ६) चर्मरोग, रक्तविकार आदि बिमारियों की इस ऋतु में संभावना बढ़ जाती है | नींबू, अदरक, गाजर, खीरा स्वास्थ्यप्रद रहेगा | ७) सूर्यकिरण स्नान सभी ऋतुओं में स्वास्थ्य के लिए हितकारक है | ८) अश्विनी मुद्रा- श्वांस रोककर योनि संकोच लेना और मन में भगवान का जप करना इस सीज़न की बिमारियों को भगाने की एक सुंदर युक्ति है | न करने योग्य :- १) गरम, तले हुए, रूखे, बासी, डबल रोटी, आटा लगा हुआ बिस्किट आदि स्वास्थ के लिए इस सीज़न में हितकर नहीं है । फास्ट फ़ूड से बचना चाहिए | २) देर रात बारिश के सीज़न में न जागें | ३) अधिक श्रम, अधिक व्यायाम न करें | ४) खुले आकाश में सोना खतरे से खाली नहीं है । ५) ज्यादा देर तक शरीर भीगा हुआ न रखें | सिर गिला हो तो तुरंत पौंछ लें। ६) भीगे शरीर न सोयें और रात्रि को स्नान न करें | मासिक धर्म आये तो तुरंत स्नान करके सूखे कपडे से अपने को पौंछ लें |
- Pujya Bapuji Delhi 30th June'2012
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