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सुबह उठते हुए ये देखें :-
उठो ना नींद से तो पूछों कौन उठा ? शारीर उठा ? ये तो हाड़ मांस का जड़ शारीर है ये कैसे उठा ? तो आत्मा उठा ? आत्मा तो नित्य है चैतन्य है | शरीर सो जाएँ तभी भी आत्मा की चेतना से सवाँस चलता है | तो कौन उठा ? बोले मन उठा आह ! मन तू उठा है अब तू जहाँ दुःख की कल्पना करेगा वहाँ दुःख मिलेगा सुख की कल्पना करेगा सुख मिलेगा लेकिन सचमुच में कल्पना करके तू सदियों से मर रहा है | अब तो सुख ओर दुःख सब कल्पना है, सुख और दुःख सब सपना है उसको जानने वाला चैतन्य आत्मा मेरा अपना है ॐ ॐ लम्बा श्वास लो ॐ.... जैसे पानी पर सेवाल (काई) चढ़ जाती है पानी को ढकती है ऐसे ही हमारे चैतन्य स्वाभाव पर नासमझी की काई की परत चढ़ गयी है और उलटी दिशा को भाग रहें है | ओमकार के गुंजन से उस परत को हटाने में बल आयेगा हरी ॐ ...... जो हर दम है, हर समय है, हर स्थान पर है उस हरी को हम पुकारतें है | ऐसे उच्चारण १० मिनिट करो थोड़े दिन में आपका वो जो उल्टा ज्ञान है वो क्षीण हो जायेगा और शुद्ध ज्ञान प्रगट होने लगेगा |
-Pujya Bapuji Mumbai 3rd June 2012
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