Sant Shri Asharamji Ashram
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होम्योपैथिक उपचार विभिन्न हृदय रोगों में कारगर रहे हैं। यह रोगसूचक हृदय रोग में, उच्च रक्तचाप से, हाइपरकैलोस्ट्रोलेमिया और हृदय अरहायथिमियास से तीव्रता से राहत दे सकता है। यह सुरक्षित है, प्राकृतिक, प
्रभावी उत्पादों और प्रक्रिया, के साथ लगभग कोई दुष्प्रभाव नही है, और लत के लिए भी कोई संभावना नही है।
हृदय रोगों के लिए होम्योपैथिक चिकित्सा :
होम्योपैथी हृदय रोगों की रोकथाम और दिल के दौरे के बाद रोग के रोगियों के प्रबंधन में मुख्य भूमिका निभाती है। होम्योपैथिक दवाएं हृदय रोगों के नियंत्रण और दिल के दौरे के विभिन्न कारणों जैसे कोलेस्ट्रॉल मे वृद्धि, उच्च रक्तचाप आदि को भी रोकता है। लेकिन गंभीर दिल के दौरे के मामले में इमर्जन्सी चिकित्सा लेना ना भूले |
उच्च कोलेस्ट्रॉल के लिए उपचार
होम्योपैथिक चिकित्सा उच्च कोलेस्ट्रॉल का उपचार कर अथेरोस्क्लेरोसिस को भी नियंत्रित कर सकती है जो धमनियों के अवरोधन का और दिल के दौरे का कारण होता हैं।
होम्योपैथिक चिकित्सा में Sumbul , Strophanthus , Strontium Carb. रक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए प्रभावी रहे हैं। कुछ होम्योपैथिक औषधियों को हृदय वाहिकाओं मे कोलेस्ट्रॉल के संचय को कम करने के लिए भी मशहूर माना जाना जाता है। इनमे Crataegus,Aurum Met., Baryta Carb., Calcarea Carb. शामिल हैं।
होम्योपैथिक उपचार आहार संशोधन और नियंत्रण के साथ जुङा है, अतः औषधि के साथ हि शारीरिक व्यायाम भी किया जाना चाहिए। उपचार में कोई परिवर्तन प्रायः रक्त कोलेस्ट्रॉल के परीक्षण के बाद किया जाता है। औषधियों के प्रभाव के आधार पर दवाओं का प्रयोग आमतौर पर धीरे - धीरे कम होता जाता है। अक्सर दवा का चयन लक्षणों और वैयक्तिक आधार पर हि किया जाता है।
उच्च रक्तचाप का उपचार:
रोगीयों में उच्च रक्तचाप का उपचार रोगी के द्वारा पूर्व में ली जा रही चिकित्सा (एलोपैथी या होम्योपैथिक) पर भी निर्भर करता है ।
इसमें कुछ दवाओं जैसे Aurum met., Belladonna, Calcarea Carb., Glonoine, Lachesis, Nat.Mur., Nux Vom., Phos., और Plb.Met. जैसी औषधियां शामिल हैं,
ऐसे रोगी जो उच्च रक्तचाप के नियंत्रण के लिए एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करते है जैसे बीटा ब्लॉकर्स, कैल्शियम, चैन ब्लॉकर्स, एसीड इनहिबीटर आदि लम्बी अवधि के लिए होम्योपैथिक उपचार के साथ आमतौर पर मुश्किल है। अतः कई बार देखा गया है की उच्च रक्तचाप के नियंत्रण एवं हृदय रोगों के लिए ली जा रही एलोपैथिक दवाओं के साथ हि कुछ चिकित्सक होम्योपैथिक दवाएं भी देतें है जैसे Rauwolia, Allium Sativum, Pssiflora, Baryta Mur., Adrenalin, Belladonna,Glonoine, GelGelsemium जो रोगियों के लिये प्रायः बहूत हि लाभदायक साबित होती है।
प्रस्तुत लेख का उद्देश्य, जनसामान्य में होमियोपैथिक चिकित्सा जैसी निर्दोष पद्धति के प्रति जागरूकता लाना मात्र है, कोई भी व्यक्ति लेख में वर्णित किसी भी औषधि को किसी कुशल होमियोपैथिक चिकित्सक से परामर्श के बाद हि लें, अपने आप किसी भी औषधि का प्रयोंग ना स्वयं पर करें, ना हि किसी अन्य रोगी पर कर के अपने तथा उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करें...पाठकों से ऐसी हमारी करबद्ध प्रार्थना है......!!
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उत्तम स्वास्थ हेतु उत्तम टेबलेट : होमियो पावर केयर
इसके लाभ :
* रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाकर शरीर को रखे तंदुरुस्त एवं बचाये रोगों से |
* शरीर के सारे रोगों को जड से समाप्त करने में सक्षम |
* शारीरिक विकास एवं कोषों के पुननिर्माण में सहाय्यक |
* रोगी या निरोगी शरीर की कार्यक्षमता बढ़ाने में हितकर |
विशेष प्रयोग :
* एड्स, कैन्सर, टी.बी. आदि जानलेवा रोगों से ग्रस्त रोगियों को चमत्कारिक आराम |
* बीमार एवं निर्बल व्यक्ति के लिए अत्यंत हितकर |
* गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं के लिए उत्तम स्वास्थ टॉनिक |
* बुद्धिजीवी, शारीरिक काम करनेवाले एवं वृद्ध लोगों के लिए उपयुक्त |
सेवन-विधि : १ – १ गोली दिन में तीन बार चूसकर ही लें |
संत श्री आशारामजी आश्रमों व समितियों के सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध |
होमियो तुलसी गोलियाँ
आज की दौड़-धुप भरी जिंदगी जीनेवालों के पास इतना समय कहाँ है कि वे शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान से पतित पावनी तुलसी का सेवन कर सकें, अत: इसी बात को ध्यान में रखते हुए आश्रम के पवित्र वातावरण में उपजी सर्वरोगहारी तुलसी को होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति द्वारा तैयार करके छोटी-छोटी, मीठी गोलियों के रूप में बनायीं गयी है :
इनके नियमित सेवन से -
ह्रदयरोग,अस्थमा (दमा), हिचकी,विष-विकार, श्वास-खाँसी, प्रतिश्याय, खून की कमी, दंत रोग में चमत्कारी लाभ मिलता है । साथ ही ये शिर:शूल, प्रजनन तथा मुत्रवाही संस्थान के रोगों की श्रेष्ठ औषधि हैं ।
बच्चों का चिडचिडापन, आँखों की लाली, एलर्जी के कारण छींके आना, नाक बहना, मुँह में छाले, गले में दर्द, पेशाब में जलन, जीर्ण ज्वर, पसली का दर्द,सर्दी,अरुचि, सुस्ती, दाह आदि के लिए भी ये उपयोगी है । ये पित्त को उत्पन्न करती है तथा कफ और वाट को विशेष रूप से नष्ट करती है । फिर भी पित्त प्रकृतिवाले लोग यदि दो-दो गोली सुबह-शाम आधा कप पानी में घोलकर लें तो उन्हें भी इसके लाभ निश्चित रूप से मिल सकते है ।
ये ह्रदय के लिए हितकर, ह्रदयोत्तेजक, उष्ण तथा अग्निदीपक है एवं कुष्ठ, मूत्र विकार, रक्त विकार, पार्श्वशूल आदि को नष्ट करनेवाली हैं । ये ह्रदय हेतु बलवर्धक होने से अनेकप्रकार के शोध-विकारजन्य रोगों में आराम देती हैं । यकृत (लीवर) और अमाशय के लिए बलवर्धक हैं ।
सिर का भारी होना, पीनस, माथे का दर्द, आधा शीशी, ज्वर, जुकाम तथा toncil आदि गले के रोगों के लिए बहुत लाभकारी है । मिरगी, नासिका रोग, कृमि रोग आदि में विशेष लाभ करती हैं ।
एसिडिटी, संधिवात, मधुमेह (डायबिटीज), खुजली, यौन दुर्बलता, प्रदाह और नजला, फेफड़ों में खरखराहट की आवाज आने पर या गला बैठने पर विशेष लाभकारी हैं ।
इनमे निहित थाईमोल तत्व दाद, एक्जिमा, ल्यूकोडर्मा, छाज-खाज, शरीर के ऊपर सफेद धब्बे आदि त्वचा संबंधी रोगों में लाभ करता हैं ।
पाचनशक्ति बढ़ाने के लिए, अपच रोगों के लिए तथा बालकों के यकृत, प्लीहा संबंधी रोगों के लिए तथा वामन की स्थिति में ये अपना विशेष प्रभाव दिखाती हैं ।
ये शारीरिक बल एवं स्मरणशक्ति में वृद्धी के साथ-साथ आपके व्यक्तित्व को भी प्रभावशाली बनाती हैं । इन्हें थोड़े दिनों तक लेते रहने से मेधाशक्ति बढती है, ये एक प्रकार की टॉनिक हैं । ये मानसिक तनाव से बचाती हैं और टी बी के जीवाणुओं का बढ़ना रोक देती हैं ।
इनके नियमित सेवन से मोटापा घटता है एवं पतले व्यक्ति का वजन बढ़ता है यानी ये शरीर का वजन आनुपातिक रूप से नियंत्रित करती हैं ।
ऋतू-परिवर्तन में होनेवाली सर्दी एवं जुकाम में यह फायदा करती हैं ।
ये हर आयुवर्ग के रोगी तथा निरोगी सभी के लिए लाभदायी हैं ।
सेवन विधि : 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे 1 गोली दिन में 3 बार चूसें तथा एनी सभी 2-3 गोली दिन में 3 बार चूसें, कृपया गोलियों को हाथ से स्पर्श ना करें ।
चेतावनी : इनके सेवन से पहले एवं बाद डेढ़ से दो घंटे तक दूध न पियें, चर्म रोग हो सकता है । इन्हें रविवार को न खायें ।

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