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शीतकारी (सीत्कार) प्राणायाम
विधिः किसी सुगम आसन में बैठ जायें। नेत्रों को बंद रखें। दाँतों की पंक्तियों को एक दूसरे पर रखें। जिह्वा को मुँह के भीतर पीछे की ओर इस प्रकार से मोड़ें कि उसके अग्रभाग का स्पर्श तालू से हो। होठों को खोलकर अधिक से अधिक फैलायें। अब मुँह के द्वारा सी जैसा शब्दोच्चार करते हुए गहरा श्वास लें। पूर्ण रूप से श्वास लेने के बाद जिह्वा तथा दाँतों को सामान्य स्थिति में रखकर मुँह बंद करें। श्वास को 5 से 10 सेकंड तक अंदर रोके रखें। बाद में दोनों नथुनों से धीरे धीरे श्वास छोड़ दें। इस प्रकार तीन प्राणायाम करें। धीरे धीरे इसकी आवृत्तियाँ 5-7 तक बढ़ा सकते हैं।
लाभः शीतली प्राणायाम के सब लाभ इस प्राणायाम कसे भी प्राप्त होते हैं। इस प्राणायाम से बल, तेज, सौंदर्य व सत्त्वगुण की वृद्धि होती है। यह प्राणायाम करने वाला व्यक्ति निद्रा के वशीभूत नहीं होता और न ही से आलस्य आता है। उसके शरीर में सदैव उत्साह व स्फूर्ति बनी रहती है।
सावधानियाँ- शीतली प्राणायाम के समान।
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