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मसाले के औषधि प्रयोग :- जिरा ये त्रिदोषशामक, वायुनाशक, वेदनाहारक और मात्रृदुग्धवर्धक है | * जिरा व मिश्री समभाग पीसकर ५-६ ग्राम मिश्रण सुबह-श्याम दूध के साथ लेने से माताएँ के दूध बढ़ जाता है|२-३ ग्राम जीरे का पूड गुड के साथ खाने से भी माँ का दूध बढ़ जाता है | * सफेद जिरा ऊबाल के उस पानी से कुछ दिन मुँह धोने से फोड़ो-फंसी, के डाग दूर होते है | * जिरा और मिश्री समभाग पीसकर २ से ५ ग्राम मिश्रण चावल के पानी के साथ लेने से श्वेतपदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है | धना : ये शीतल, त्रिदोषशामक और मस्तिष्क को बल देनेवाला है | * पित्तजन्य रोगोमे धना, सौंफ और आँवला समभाग चूर्ण बनाकर और उसमे उतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर ये मिश्रण १० ग्राम एक ग्लास पानीमें ४- ६ घंटे भिगोकर रखना और छानकर हररोज पीने से फायदा होता है | * हरा धनियाँ के रस में सक्कर मिलाकर पीने से अनिद्रा,उलटी और सिरदर्द में लाभ होता है | * थोडा धना चबा-चबाकर खाने से सगर्भावस्था से होने वाली पित्तशामक बीमारी दूर होती है| * खाने खाना के बाद तुरंत शौच को जाने के आदत है तो २ ग्राम धना पावडर लेकर उसमे थोडा काला नमक मिलाकर खाना खाने के बाद लेना लाभ होता है | सौंफ : ये सुंगधित, बलबर्धक और रुचिकारक है | * सौंफ और मिश्री चबा-चबाकर खाने से नेत्रज्योति बढती है और पित्त का शमन होता है | खाना खाने के बाद सौंफ खाने से मुँह के छाले और दुर्गंधी मिटती है | * आधा चमच सौंठ और १ चमच सौंफ का काढ़ा बनाकर सुबह-श्याम पीने से जुलाब में आराम मिलता है | * १ चमच सौंफ पावडर रात को पानी के साथ पीने से पेट साफ़ होता है | * ५ ग्राम सौंफ व ५ ग्राम मिश्री पीसकर शरबत बनाके पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है |