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Divine Experiences

गुरुकृपा से हज़ारों गाँव वालों को मिली सूखे से राहत

सन 2007 की बात है। हमारे गाँव मे सूखा पड़ा था। लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे थे।
हम लोग मदद हेतु जिला अधिकारी के पास गए तो उन्होंने हमारे गाँव में बोर करने वाली गाड़ी और जियोलॉजिस्ट (भूगर्भशास्त्री) को भेजा। जियोलॉजिस्ट ने 3 जगह पानी का पॉइंट बताये।
तीनो जगहों पर 600-600 फीट ड्रिल करवाई लेकिन 1 जगह भी पानी नहीं निकला, तब ड्रिल करने वाले निराश होकर लौटने लगे।
     हम कुछ साधको ने मिलकर उनसे विनती की : 'एक बार और ड्रिल करे।' लेकिन वे तैयार नही हुए। पुनः आग्रह किया तो एक शर्त पर मान गए कि ' अगर वहाँ पानी नही निकला तो पैसे तुमको देने होंगे।' 
    हम सब ने उनकी बात मान ली।
एक जगह निश्चित कर वहाँ बड़ दादा  की मिट्टी रखी, पूज्य बापू जी के श्रीचित्र की स्थापना की, श्रद्धापूर्वक गुरुमंत्र का जप किया और वही ड्रिल करवाई तो मात्र 260 फीट मे ही 4 इंच से ज्यादा पानी निकला!
इस बात को 10 साल हो गए, आज भी पूरे गाँव मे लगभग 5000 लोग उसी बोरवेल का पानी पीते है। बोर में भरपूर पानी है और लोग उसे हरि ॐ बोरवेल के नाम से जानते है।

     जिनकी कृपा से सूखे इलाके में पानी-पानी हो गया,हजारो गांववालों को राहत मिली ऐसे महिमावान गुरुदेव के श्री चरणों मे हम सब गाँववालो का  कोटि-कोटि प्रणाम!


-दिलीप मुधाले
सवाली, जिला बीदर(कर्नाटक)
मोबाइल- 9886982859

ऋषिप्रसाद मई 2018
पृष्ठ संख्या 32
अंक11 निरन्तर अंक305
गुरु कृपा से भयंकर दुर्घटना टली
मुझे पूज्य बापू जी से मंत्र दीक्षा प्राप्त होने के बाद मेरा जप - ध्यान व ऋषिप्रसाद की सेवा अखण्डरूप से चल रही है।
एक बार मैं और मेरे पति कार से  जा रहे थे। बारिश के कारण सड़क फिसलाऊ हो गयी थी। गाड़ी तेज गति से जा रही थी।
अचानक रेलवे क्रासिंग देखकर पति ने ब्रेक लगाए, जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर 180 डिग्री (ठीक विपरीत दिशा में) घूम गयी।
सड़क की दोनो तरफ 10 - 10 फीट गहरी खाईयाँ थी। यह देख मैं घबरा गई। और मेरे मुहँ से बस
इतना ही  निकला: ' बापूजी!  बचाओ !' इतने में कार रुक गयी।
और हम भयंकर दुर्घटना से बच गए। अगर गाड़ी ज़रा-सी भी 
इधर -उधर  हो जाती तो  न जाने  हमारा क्या होता !  
बापू जी ने मेरी पुकार सुनकर हमारी जान बचाई।
मेरे पति पहले बापूजी को नही मानते थे पर दुर्घटना से बचने से वे बहुत प्रभावित हुए। बोले कि
 " मानना पड़ेगा,  गुरुकृपा में शक्ति होती है अब मैं भी मंत्रदीक्षा लूँगा।"
     सभी गुरुभाई बहनों को गुरुदेव से मंत्रदीक्षा के  समय जो नियम मिले है उन्हें वे कभी न छोड़ें।
सद्गुरु, प्रदत्त  कष्ट और अनिष्ट से हमारी रक्षा करते हैं ।
इष्ट जब मजबूत होता है तो अनिष्ट नहीं होता।

          - श्रीमती शीला सिंह
         मोबाइल 9452419257
ऋषिप्रसाद जुलाई2018  पृष्ठ संख्या 32 अंक 1  निरन्तर अंक307
गुरु कृपा से पूरे भारत में पाया प्रथम स्थान

मैने 5 साल की उम्र में पूज्य बापू जी से सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा ली थी । मैं जब छोटी थी तब बापू जी हमारे घर पधारे थे। तब बापूजी की मुझपर कृपा हुई और मेरा आज्ञाचक्र सक्रिय हो गया ।

      मैने सन 2012 से 2014 तक संतश्री आसारामजी गुरुकुल, छिंदवाड़ा में अध्ययन किया । वहाँ त्रिकाल संध्या, त्राटक, ध्यान, प्राणायाम आदि बहुत कुछ करवाया जाता था जिससे मुझे बहुत फायदा हुआ। वहाँ नियमित बापू जी का सत्संग चलाया जाता था तो हम उन्ही सत्संग विचारों में रहते थे। गुरुकुल में जो आध्यात्मिक माहौल मिलता है वह घर पर मिल ही नही सकता, वहाँ विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होता है।
         

हाल ही में मैने NEET-2019 में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 
मैने बायलॉजी में पूरे भारत से 15 लाख बच्चो में प्रथम स्थान प्राप्त किया।  यह उपलब्धि मुझे पूज्य बापूजी की कृपा, मार्गदर्शन व आर्शीवाद से ही प्राप्त हुई है।
  
          - कृष्णाई राठौर
             मो. 7020630533

पूज्य बापू जी के चमत्कार की सत्य घटना
हरि ॐ


पूज्य बापू जी के चमत्कार की सत्य घटना

मेरे पिता 70 वर्षीय श्री राम नारायण माथुर(    एच. एम.शिक्षा) में जीवन के साथ घटना का चमत्कार हुआ।
कुछ समय पहले उनके बाए पैर की एड़ी के ऊपर आँवला के साइज का फोड़ा हुआ जिसका ऑपरेशन बॉम्बे हॉस्पिटल इंदौर में करवाया गया 8-10 दिन एडमिट रहने के बाद डॉक्टरों ने घर ले जाने की अनुमति दे दी और एक माह की दवा खाने को दी गयी।

किंतु मेरे पिताजी के पैर का फोड़ा ठीक नही हुआ और पस निकलना बंद नही हुआ।
पुनः इंदौर 1 माह बाद दिखाया तो डॉक्टरों ने सलाह दी कि इनको जयपुर ले जाओ इनका घुटने से ऊपर का पैर कटेगा तभी ठीक हो पायेगा।
भोपाल एवं सागर के हड्डी रोग विशेषज्ञों ने भी राय दी कि पैर कटवाना पड़ेगा।

हमारे मकान के सामने जैमिनी एडवोकेट रहते है उनके द्वारा बताया गया कि पूज्य बापू जी के शिविर में आप दिखाओ
तभी पूज्य बापू जी का शिविर इंदौर में लगा। उस शिविर में पिताजी को दिखाया उन्होंने पैर में लगाने की लेप भरने की दवा दी
एक गौझरण अर्क, आँवला जूस एवम आंवला चूर्ण तथा शुगर की टेबलेट खाने को दी गयी।
15 दिनों के बाद मेरे पिताजी का पैर एड़ी का फोड़ा ठीक हो गया
और पैर को कटवाने का मौका ही नही आया
तब से हमने सहपरिवार बापूजी से दीक्षा ले ली एवं पूज्य बापू जी हमारे लिए ईश्वर हुए।

     राजेन्द्र माथुर
  (राजस्व निरीक्षक)
जिला उज्जैन ( म. प्र.)
श्री बजरंगभवन, सुभाष कालोनी
कमला गंज जिला शिवपुरी
मो. 6263768360

मिटी कष्टों की तपन
सन् 2001 में मुझे पूज्य बापू से दीक्षा लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 29 जुलाई 2003 की शाम को एक ट्रक एवं बस के बीच में आकर मेरा एक्सीडेंट हो गया। मेरी छाती की कुल 19 हड्डियाँ टूट गयीं एवं गले के नीचे की दाहिनी तरफ की हड्डी टूटकर लटक गयी। मुझे यहाँ के सुप्रसिद्ध ‘कलकत्ता हास्पिटल’ में ले जाया गया। दूसरे दिन वहाँ के डॉक्टरों ने मेरे घरवालों को मुझे आखिरी बार आकर देख लेने के लिए कहा। यह जानकर कोलकाता आश्रम में उपस्थित 300 साधक भाई-बहनों एवं मेरे घरवालों ने मेरे जीवन की रक्षा के लिए पूज्य बापू जी से प्रार्थना की एवं सामूहिक रूप से 21 बार ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप किया। बापूजी की कृपा से मैं मौत के मुँह से बाहर आ गया, मुझे दूसरा जन्म मिला है। मुझ पर राहू ग्रह की बाधा चल रही है और वह कई वर्षों तक चलेगी ऐसा एक मशहूर ज्योतिषी ने 15 वर्ष पहले मुझे बताया था। उनके अनुसार अभी भी राहु के प्रभाव के कारण मेरा कुछ बुरा वक्त बाकी है। मैंने दीक्षा लेने से पूर्व 11 वर्षों तक कामकाज में तथा और भी कई प्रकार से तकलीफें सहन कीं। मगर पूज्य बापू जी से दीक्षा लेने के बाद मेरा काम ठीक चल रहा है। मुझे हर विकट परिस्थिति में ऐसा एहसास होता रहा है कि कोई दैवी शक्ति मेरी मदद कर रही है और मेरे कष्टों का निवारण कर रही है। अब मुझे एकदम निश्चिंतता महसूस होती है। पहले मैं करीब 20-25 ज्योतिषियों के पास जाता था। हर कोई ग्रहबाधा की बात कहते है। मगर बापू जी से दीक्षा लेने के बाद मुझे कभी भी ज्योतिषियों के पास जाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, न कभी इसका ख्याल ही आया। आत्मज्ञान एवं योग-सामर्थ्य दोनों का अनोखा संगम जिनमें है, ऐसे मेरे सदगुरुदेव की शरण में आने वालों की कठिनाइयाँ तथा विपत्तियाँ छू हो जाती हैं और उनकी समझ बहुत ऊँची हो जाती है। पूज्य बापू जी का सत्संग सुनने से व्यक्ति देहभाव से ऊपर उठ जाता है। तन-मन तक ही जिनका प्रभाव रहता है वे बेचारे ग्रह उसे क्या हानि पहुँचा सकेंगे ? वे तो उसके अनुकूल होने में ही अपना अहोभाग्य समझेंगे।

राकेश अरोरा, पी-808, लेक टाउन, फर्स्ट फलोर
ब्लाक – ए, कोलकाता, – 89
ऋषि प्रसाद, मार्च 2005, पृष्ठ संख्या 29, अंक 147

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