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11/13/2015

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11/13/2015

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11/13/2015

आपसत्यस्वरुपहोभोग और मोक्ष अर्थात् ऐहिक आजादी और चौरासी लाख जन्मों के गर्भवास के कष्ट से आजादी, मुक्ति पा लें । केवल ऐहिक आजादी पर्याप्त नहीं है । चौरासी लाख जन्मों के कष्टों से भी आजादी पाना यह बुद्धिमान सज्जनों का लक्ष्य होता है ।-पूज्य बापूजी

8/15/2015

    आपसत्यस्वरुपहोतर्कोऽप्रतिष्ठः श्रुतयो विभिन्ना नैको ऋषिर्यस्य मतं प्रमाणम् |
    धर्मस्य तत्त्वं निहितं गुहायां महाजनो येन गतः स पन्था ||
    ‘धर्मके विषय में तर्ककी कोई प्रतिष्ठा (स्थिरता) नहीं, श्रुतियां भिन्न-भिन्न तात्पर्यवाली हैं तथा ऋषि-मुनि भी कोई एक नहीं हैं, जिसस

    8/15/2015

      Niraj Pathakजिस चिदेकरस परमात्मा से ज्ञाता,ज्ञान,ज्ञेय,दृष्टा,दर्शन,दृश्य, कर्ता, हेतु और क्रिया - ये सब व्यावहारिक पदार्थ आविर्भूत होते हैं । उस ज्ञाता आदि के साक्षी और परमार्थतः ज्ञानरुप से अवस्थित प्रत्यगात्मा को नमस्कार है । - श्री योग वशिष्ठजी महाराज

      8/11/2015

      • Ashram Indiaसाधु...साधु...साधु8/11/2015

      Ashram Indiaजहाँ तुम रहते हो उसी दुनिया में सद्गुरु भी रहते हैं पर तुम जिस दुनिया से खिन्न और परेसान होते हो वे उसी दुनिया से प्रसन्न और आनंदित होते हैं वह कौन सी कला है- जरा सचो...? - पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

      8/11/2015

        SuperUser AccountNarayana..Narayana...Narayana...Narayana..
        Hari OM to everyone !!

        6/17/2015