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मिटी कष्टों की तपन

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मिटी कष्टों की तपन

सन् 2001 में मुझे पूज्य बापू से दीक्षा लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 29 जुलाई 2003 की शाम को एक ट्रक एवं बस के बीच में आकर मेरा एक्सीडेंट हो गया। मेरी छाती की कुल 19 हड्डियाँ टूट गयीं एवं गले के नीचे की दाहिनी तरफ की हड्डी टूटकर लटक गयी। मुझे यहाँ के सुप्रसिद्ध ‘कलकत्ता हास्पिटल’ में ले जाया गया। दूसरे दिन वहाँ के डॉक्टरों ने मेरे घरवालों को मुझे आखिरी बार आकर देख लेने के लिए कहा। यह जानकर कोलकाता आश्रम में उपस्थित 300 साधक भाई-बहनों एवं मेरे घरवालों ने मेरे जीवन की रक्षा के लिए पूज्य बापू जी से प्रार्थना की एवं सामूहिक रूप से 21 बार ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप किया। बापूजी की कृपा से मैं मौत के मुँह से बाहर आ गया, मुझे दूसरा जन्म मिला है। मुझ पर राहू ग्रह की बाधा चल रही है और वह कई वर्षों तक चलेगी ऐसा एक मशहूर ज्योतिषी ने 15 वर्ष पहले मुझे बताया था। उनके अनुसार अभी भी राहु के प्रभाव के कारण मेरा कुछ बुरा वक्त बाकी है। मैंने दीक्षा लेने से पूर्व 11 वर्षों तक कामकाज में तथा और भी कई प्रकार से तकलीफें सहन कीं। मगर पूज्य बापू जी से दीक्षा लेने के बाद मेरा काम ठीक चल रहा है। मुझे हर विकट परिस्थिति में ऐसा एहसास होता रहा है कि कोई दैवी शक्ति मेरी मदद कर रही है और मेरे कष्टों का निवारण कर रही है। अब मुझे एकदम निश्चिंतता महसूस होती है। पहले मैं करीब 20-25 ज्योतिषियों के पास जाता था। हर कोई ग्रहबाधा की बात कहते है। मगर बापू जी से दीक्षा लेने के बाद मुझे कभी भी ज्योतिषियों के पास जाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, न कभी इसका ख्याल ही आया। आत्मज्ञान एवं योग-सामर्थ्य दोनों का अनोखा संगम जिनमें है, ऐसे मेरे सदगुरुदेव की शरण में आने वालों की कठिनाइयाँ तथा विपत्तियाँ छू हो जाती हैं और उनकी समझ बहुत ऊँची हो जाती है। पूज्य बापू जी का सत्संग सुनने से व्यक्ति देहभाव से ऊपर उठ जाता है। तन-मन तक ही जिनका प्रभाव रहता है वे बेचारे ग्रह उसे क्या हानि पहुँचा सकेंगे ? वे तो उसके अनुकूल होने में ही अपना अहोभाग्य समझेंगे।

राकेश अरोरा, पी-808, लेक टाउन, फर्स्ट फलोर
ब्लाक – ए, कोलकाता, – 89
ऋषि प्रसाद, मार्च 2005, पृष्ठ संख्या 29, अंक 147

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