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मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं…..

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मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं…..

मेरे पुत्र दिव्येश कुमार (उम्र 16 वर्ष) को बचपन से कुछ सुनायी नहीं देता था। कई एलोपैथिक दवाइयाँ की परंतु कुछ भी लाभ नहीं हुआ। मुझे कुछ साधकों द्वारा पता चला कि गुरुदेव ने ओंजल आश्रम के बड़ बादशाह पर शक्तिपात करते समय कहा था कि इस बड़ बादशाह (कल्पवृक्ष) की जटाओं का रस कान में डालने से बहरापन मिट जायेगा। संतों के प्रति श्रद्धा-भक्ति से युक्त होकर उनके वचनों में दृढ़तापूर्वक विश्वास किया जाय तो प्रकृति भी सेवा करने को राजी हो जाती है, इसका मैंने प्रत्यक्ष अनुभव किया। मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं….
अर्थात् ब्रह्मनिष्ठ सदगुरूदेव के श्रीमुख से उच्चारित वाक्य मंत्र के समान होते हैं – यह जो शास्त्र वचन हैं, वह परम सत्य है, बस आपमें गुरू-वाक्य के प्रति दृढ़ श्रद्धा होनी चाहिए। हमने बड़ बादशाह की जटाओं का रस दिव्येश के कानों में डाला। बचपन से कुछ न सुन पाने वाले मेरे बेटे ने जब पहली आवाज सुनी तो वह हर्ष से गदगद हो गया। हमारे पूरे परिवार का हृदय पूज्य बापू जी के प्रति अहोभाव से भर गया। सबके दुःख हर लेने वाले निःस्वार्थ हितैषी भगवत्स्वरूप गुरूदेव को मेरे कोटि-कोटि प्रणाम !

धनजीभाई पटेल
भिनार, जिला. नवसारी (गुजरात)
स्रोतः ऋषि प्रसाद, अंक 198, जून 2009, पृष्ठ संख्या 30

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