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लापता बहन मिली

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लापता बहन मिली

10 अप्रैल 1999 को मेरी छोटी बहन घर से बिना बताये अचानक लापता हो गई। मैंने अमदाबाद आश्रम के पते पर बापू जी को पत्र लिखा किन्तु बापू जी वहाँ नहीं थे। मैंने अपनी जप संख्या बढ़ा दी। इस तरह सवातीन महीने बीत गये और इस दरमियान हम लोगों ने खूब रुपये खर्च कर डाले। मेरे घरवालों ने 1000 रुपयों की और व्यवस्था की एवं कहाः “बापू जी के पास निकल जा इसी समय।” रायपुर आश्रम से पता चला कि बापू जी गुरुपूनम के अवसर पर इन्दौर के लिए निकल पड़ा। दूसरे दिन इन्दौर पहुँचा और तभी से मैंने बापू जी से मिलने के पाँच-सात बार प्रयास किया किन्तु असफल रहा। मैंने दृढ़ संकल्प किया था कि बापू जी से मुलाकात करके ही जाऊँगा, अन्यथा नहीं जाऊँगा। 20 जुलाई 1999 को बापू जी का अंतिम सत्संग दिवस था। बापू जी दोपहर बारह बजे दिल्ली के लिए रवाना होने वाले थे। मैंने अपनी बहन की फोटो हाथ में पकड़कर पूज्य श्री को दूर से ही दिखा दी और बताया किः “बापू जी ! यह मेरी छोटी बहन है जो कुँवारी है पिछले साढ़े तीन महीने से लापता है।” तभी मेरे परम पूज्य बापू जी ने दाहिने हाथ में एक सेवफल लेकर फोटो को मारा। मैं खुशी-खुशी घर आया और उसी रात को मेरी बहन का पता लग गया। ठीक एक सप्ताह बाद मेरी बहन अकेली सकुशल वापस आ गई। ऐसे हैं मेरे सदगुरु ! परम पूज्य बापू जी को हमारे घर-परिवार की ओर से शत-शत नमन !

मुकेश कुमार दुबे

ग्राम पोस्टः तुमगाँव, जिला महासमुन्द (मध्य प्रदेश)

ऋषि प्रसाद, अंक 87, पृष्ठ संख्या 30, मार्च 2000
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