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मौत के मुख से वापसी

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मौत के मुख से वापसी

29 सितम्बर 1999 को सुबह नौ बजे हम चार लड़के बोर्ड का फार्म भरने के लिए दो होण्डा मोटरसाइकिल पर सवार होकर भीलवाड़ा से अजमेर के लिए निकल पड़े। मैंने श्री आसारामायण का मौखिक पाठ आरम्भ कर दिया। पाठ लगभग पूरा होने को था और हम भीलवाड़ा से 60 कि.मी. दूर निकल चुके थे। हमें 70 कि.मी. और चलना ही था कि हम हाइवे पर जिस ट्रक को दाहिने तरफ से पार कर रहे थे वह उसी तरफ मुड़ गया और हमारा एक्सीडेंट हो गया। एक्सीडेंट इतना खतरनाक था कि हमारी पूरी गाड़ी बिखर गई और उसी समय हमें ऐसा लगा कि जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने हमें बाहर उछाल फेंका हो। हम मौत के मुँह में जाकर भी वापस जिंदा आ गये। हम दोनों को उस वक्त साधारण चोटें आईं, दोनों के बाएँ हाथ में फ्रैक्चर हो गये। जब हम ट्रक के नीचे से जिंदा निकले तो लोग आश्चर्य कर रहे थे और हम दोनों उस अदृश्य शक्ति श्री सदगुरुदेव को मन-ही-मन प्रणाम कर रहे थे।

लाटूलाल वर्मा
गायश्री नगर, भीलवाड़ा
ऋषि प्रसाद, जून 2001, पृष्ठ संख्या 29, अंक 102
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