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आत्मसाक्षात्कार विषयक

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Self Realization (English)

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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी :- परमात्मप्राप्ति के लिए नियम बनाएंगे तभी तड़प होगी, तड़प होगी तभी मिलेंगे। परमात्मप्राप्ति की तड़प है और जैसा तैसा खाया, मासिक धर्म वाली स्त्री के हाथ का बनाया हुआ खाया, फिल्में देखी, जो मन में आया वो कर लिया तो यह बेवकूफी की बात है। जितना आहार-व्यवहार शुद्ध होगा उतनी उन्नति होगी। परमात्मप्राप्ति के उद्देश्य वाले और किसी चीज को महत्त्व नही देते। 
Previous Article पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।
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आत्मसाक्षात्कार सहायक

आत्मसाक्षात्कार सहायक

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ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में विघ्न 


Anusthan ke baad fir se patan kyon ? ( अनुष्ठान के बाद फिर से पतन क्यों ?) |

इश्वरप्राप्ति के 1 से 9 उपाय

Ishwar Prapti ke 1 se 9 Sadhan 


 

 

Crash Course of 12 week - 11 sadhan - Raj Yog - Bapu


1.Iswar ki bhakti, 2. Pranav ka Jap, 3. Tapsya, 4. Ektvabhav, 5. Maitri, Karuna, Mriduta, Upeksha, 

6. Pranayam, 7. Divya dhwani ke sath talbadhdha hona, 8. Mahapurusho ka sang, 9. Sewa - swapna nidra adi avastha ka nirikshan,

 10. Istdev ka dhyan, 11. Rasbhav me tanmay hona... Salamati Yog, Sidhdh Yog, Sahaj Yog, Raj Yog, 

Gyaneshwar geeta 6 adhyay, Bhawan Sambh Sada Shiv ki Mahima

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Shri Narayan Stuti

Shri Narayan Stuti

जिसको भी भगवान के विषय में ज्ञान पाना हो तो ‘नारायण स्तुति‘ पढ़े और फिर थोडा चुप रहे | ये जीभ तालू में लगा के पढ़े ..... भगवान कैसे है ये याद करते करते ह्रदय में भगवान का रस प्रगट हो जायेगा | भगवान का ज्ञान, भगवान का आनंद भगवान प्रगट हो जाते है | जैसे अच्छी चीज की अच्छाई सुनते सुनते ह्रदय अच्छा हो जाता है | तो बुराई सुनते सुनते बुरा हो जाता है | तो भगवान से बढकर कोई अच्छा है क्या ? 

भगवान कैसे है वेद में, भागवत में, उपनिषदों में अथवा जिनको भगवान मिले तो उन्होंने भगवान के विषय में जो बताया कि भगवान ऐसे है ये सब ग्रंथो में से निकालकर हमने एक छोटी पुस्तक बना दिया ‘नारायण स्तुति’ आश्रम से छपाया |

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ईश्वर प्राप्ति  सहायक साहित्य 

इश्वर प्राप्ति सहायक साहित्य

  • इश्वर की और 
  • मन को सीख 
  • निर्भय नाद 
  • जीवन रसायन 
  • दैवी सम्पदा 
  • आत्मयोग 
  • साधना में सफलता 
  • अलख की ओर
  • सहज साधना 
  • शीघ्र इश्वरप्राप्ति 
  • इष्टसिद्धि 
  • जीते जी मुक्ति 
  • ब्रह्मरामायण
  • सामर्थ्य स्त्रोत 
  • मुक्ति का सहज मार्ग 
  • आत्मगुंजन 
  • परम तप 
  • समता साम्राज्य 
  • अनन्य योग 
  • श्री योग वाशिष्ठ महारामायण 

६ महीने में आत्मसाक्षात्कार की गुप्त साधना Self Realization In 6 Months

Self realization in 6 months Bapuji 

साधना विधि

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Sakshatkar in 3 days - Vritti Siddhi

नारायण साईं जी की वाणी में ब्रह्मरामायण का पाठ

भारती श्रीजी के सान्निध्य में ब्रह्मरामायण का पाठ व व्याख्या

आत्मगुंजन


 

भगवद्गीता, राम गीता, अष्टावक्र गीता आदि कई गीताएँ हैं, इनमें सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है भगवद्गीता लेकिन तत्त्व ज्ञान में शक्तिशाली है अष्टावक्र गीता। यह छोटी सी है पर एकदम ऊँची बात कहती है। उसका अनुवाद किया भोला बाबा ने और उसे ‘वेदांत छंदावली’ ग्रंथ में छपवाया। उसमें से जितना अष्टावक्र जी का उपदेश है उतना हिस्सा लेकर अपने आश्रम ने छोटा सा ग्रंथ प्रकाशित किया और ‘श्री ब्रह्म रामायण’ नाम दिया। इसे पढ़ने से आदमी का मन तुरंत ऊँचे विचारों में रमण करने लगता है, खिलने लगता है। ऐसे दोहे, छंद, श्लोक, भजन याद होने चाहिए, ऐसे विचार स्मरण में आते रहने चाहिए। इधर-उधर जब चुप बैठें तो उन्हीं पवित्र व ऊँचे विचारों में मन चला जाये। ऐसा नहीं कि ‘मेरे दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा।’