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विनोद पुरोहित

बापूजी केखिलाफ जो भी कार्य होतेहैंवे Anti-Hindu हैं। जो कुछ भी बापूजी केखिलाफ (कार्य) हैं वेचुनाव के पहले होंगे और हिन्दुओं के वोटबैंक के खिलाफ करने के कारण वे होते हैं। आज मिडिया में नैतिक मुल्यों की कमी है। आज वे एकतरफी खबर दिखाते हैं और दूसरा पक्ष नहीं दिखाते। केवल नकारात्मक न्युज दिखाई जाती है सकारात्मक नहीं।

अमृत प्रजापति जो आश्रम में 18 साल रह चूके हैं उनका मेरी माताजी को अनुभव है। मेरी माताजी को पीठ की हड्डी की तकलीफ थी। हम बापूजी से जुडे थे इसलिए अमृत भाई के वहाँ हम गये। उन्होने हमे बताया कि आपको मलाड-गोरेगाँव में स्थित अस्पताल में 4 दिन का वैद्यकीय इलाज कराना होगा। वहाँ पर हमे पता चला कि खर्चा 35000 रु. का होगा। हमने थोड़ा इंतजार किया। फिर हमको पता चला कि अमृतभाई का उस अस्पताल से डायरेक्ट लिंक था उनको वहाँ से कमिशन मिलता था और आश्रम का उस अस्पताल से कोई संबंध नहीं था। धोकाधड़ी के कारण आश्रम से निकाला गया वही वैद्यराज आज मिडिया के लिए हिरो है। जो वह कहता है वही सच है बाकी सब झूठ है।

बापूजी के खिलाफ anti-hindus (हिन्दुओं के विरोधी) हैं। आज धर्मांतरण करने वालों पर बापूजी की वजह से रोक लगी है। इसलिए ये धर्मांतरण वाले आज बापूजी के खिलाफ उनके आश्रम से फ्रॉड करने की वजह से निकाले हुए लोगों को खड़ा करके वे (मिडियावाले) बापूजी की छबी खराब करने का प्रयत्न कर रहे हैं। आज हम लोगों ने आंतरिक शांति को पीछे रखते हुए टैक्नोलॉजी को प्राधान्य दिया है। टैक्नॉलॉजी केवल शारिरीक बिमारीयाँ ठीक करेगी पर मेन्टल तनाव (राग-द्वेष आदि) जो एकदूसरे के व्यवहार में होता है उसके उपर तो कोई भी दवाई काम नहीं करेगी। वह केवल अपना धर्म और बापूजी जैसे संत ही दे पायेगे। आजकल जो नये शादीशुदा जोडे होते हैं वे भी साथ नहीं रह पाते पर बापूजी जैसे संतों से प्राप्त हुई नैतिक शिक्षा की वजह से आज भी संयुक्त कुटुंब में हम लोग जी सकते हैं।

युवावर्ग के लिए निवेदन है कि मिडिया के द्वारा किये जाने वाले कुप्रचार को ध्यान में न रखते हुए केवल एक बार बापूजी के आश्रम-सत्संग-शिविर में जाके देखोगे तो आपको बिलकुल अलग अनुभव होगा जो पक्ष मिडिया ने आजतक कभी दिखाया नहीं है। अपना कानून बहुत कमजोर है। पहले आप केवल FIR दर्ज करो और बाद में कार्यवाही शुरु हो जाती है। मेडिकल रिपोर्ट और FIR को न देखते हुए केवल FIR के धरती पर कार्यवाही शुरु कर दी जाती हैं। उस कार्यवाही के लिए वे किसी से भी पूछताछ कर सकते हैं।

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सबका मंगल ,सबका भला का उदघोष करनेवाले प्रातः स्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अपने साधकों को भक्तियोग, ज्ञानयोग के साथ-साथ निष्काम कर्मयोग का भी मार्ग बताते है | देशभर में फैली श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सहयोग से राष्ट्रभर में नई आध्यात्मिक चेतना जगाकर पूज्यश्री का दिव्य सत्संग एवं दैवीकार्यों का लाभ गाँव-गाँव में जन-जन तक पहुँचाना, अखिल भारतीय श्री योग वेदांत सेवा समिति का मुख्य उद्देश्य है |

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