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Pujya Asaram Bapu ji (आसाराम बापू जी) Darshan Wallpaper 14th August 2013

स्वतंत्रता की बलिवेदी पर चढनेवाले भारत के वीरों के हाथों में होती थी श्रीमद्भगवद्गीता एवं मुख में होता था यही श्लोक : नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि... ऐसे वीर भी एक-दो नहीं वरन् हजारों की संख्या में होते थे । आखिर परेशान होकर अंग्रेजों ने जाँच करवायी कि : ‘इतनी बडी संख्या में देशभक्तों को फाँसी पर चढाने के बावजूद भी दूसरों का मनोबल कमजोर क्यों नहीं होता ? क्यों एक-एक करके सभी वीर हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे पर झूल जाते हैं ?' जाँच के बाद पता चला कि : ‘‘भारतवासियों के पास गीता नामक ग्रंथ है । उसमें ऐसा दिव्य ज्ञान है कि ‘जन्मता-मरता शरीर है, सुखी-दुःखी मन होता है, निश्चय-अनिश्चय बुद्धि करती है और मैं अमर आत्मा हूँ । दुनिया में ऐसी कोई फाँसी नहीं बनी है, जो मुझे मार सके ।' इसी ज्ञान को पाकर सभी वीर सहर्ष मृत्यु को अंगीकार कर लेते हैं ।'

 

 
 


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