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संत श्री आसारामजी बापू को बदनाम करने की गोपनीय निति

 

संत श्री आसारामजी बापू को बदनाम करने की गोपनीय निति

6th Dec 2009. आज कई टी.वी. चैनलों पर प्रसारित हो रहे ”राजू चाण्डक पर गोली चली, आसाराम बापू तथा दो साधकों पर संदेह” समाचार के संबंध में स्पष्टीकरण देना है कि इस गोलीकांड से संत श्री आसारामजी बापू या उनके किसी साधक का कुछ भी लेना-देना नहीं है । योग वेदांत सेवा समिति सामाजिक जीवन में किसी भी प्रकार की हिंसक घटनाओं का विरोध करती है ।


बापूजी से भयंकर द्वेष रखनेवाले राजू चांडक द्वारा इस मामले में बापूजी तथा उनके दो साधकों पर संदेह करना एकदम झूठा, आधारहीन तथा पूर्वाग्रह से ग्रस्त आरोप है । इतना बड़ा गोलीकांड तो दूर की बात है बापू के साधक किसी भी तरह की हिंसा में विश्वास नहीं करते । ऐसे में राजू चांडक द्वारा बापू तथा उनके साधकों पर संदेह कर इस मामले में उन्हें फँसाना एक सोची-समझी चाल के तहत हो रहा है । उल्लेखनीय है कि आरंभ के समाचारों में राजू चांडक द्वारा केवल बापू के दो साधकों पर ही संदेह व्यक्त किया गया था, पर बाद में पुलिस ने इस घटना से बापूजी को भी जोड़कर उन पर धारा 120 (बी) तथा दो अन्य अनजान लोगों पर पर धारा 114 और 307 लगा दी है । इससे हिन्दुओं के सम्माननीय गुरु श्री आसारामजी बापू को बदनाम करने की सरकार की गोपनीय नीति, जो गुजरात पुलिस के डी.जी.पी. शब्बीर हुसेन शेखदम खंडवावाला के निर्देशन में चल रही है, का स्पष्ट पता चल जाता है ।


ऐसे में हमें गुजरात पुलिस तथा यहाँ की सरकार तथा कोर्ट से इस मामले में न्याय मिलने की आशा नहीं है । अतः हम माँग करते हैं कि राजू चांडक पर हुई गोलीबारी तथा आश्रम पर पुलिस बर्बरता की जाँच गुजरात पुलिस से न कराकर सी.बी.आई. से अविलम्ब कराई जाय । जिससे वास्तविक अपराधियों का पता चल सके ।

 

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