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Vijayadashami

  

 

  
Tips

नेत्रज्‍योति बढ़ाने के लिये दशहरे  से शरदपूर्णिमा  तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चंद्रमा के आगे त्राटक (पलकें झपकाये बिना एकटक देखना) करें ।


Do Tratak (constant gaze without blinking the eye lids) on moon for 15-20 minutes in night from Dussehera  to Sharad poornima for improving your eye sight.

 - Pujya Bapuji 


Vijya Dashmi Articles
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Dussehra - The divine festival :
Dussehra is a divine festival. All festivals are important in their own way, but Dussehra is unique in that it points towards the over all development in life. Though a series of festivals follows Dussehra, it is the festival of Dussehra that marks the beginning of a person’s all round development....

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बिना मुहूर्त के मुहूर्त :
बिना मुहूर्त के मुहूर्त (पूज्य बापू जी के सत्संग से) विजयादशमी का दिन बहुत महत्त्व का है और इस दिन सूर्यास्त के पूर्व से लेकर तारे निकलने तक का समय अर्थात् संध्या का समय बहुत उपयोगी है। रघु राजा ने इसी समय कुबेर पर चढ़ाई करने का संकेत कर दिया था कि 'सोने की मुहरों की वृष्टि करो या तो फिर युद्ध करो।...

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दशहरा : सर्वांगीण विकास का एक श्रीगणेश :
दशहरा : सर्वांगीण विकास का एक श्रीगणेश दशहरा एक दिव्य पर्व है | सभी पर्वों की अपनी-अपनी महिमा है किंतु दशहरा पर्व की महिमा जीवन के सभी पहलुओं के विकास, सर्वांगीण विकास की तरफ इशारा करती है | दशहरे के बाद पर्वो का झुंड आयेगा लेकिन सर्वांगीण विकास का श्रीगणेश करता है दशहरा | दशहरा दश पापों को हरनेवाल...

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विजयादशमी पर्व : :
विजयादशमी पर्व : (संत श्री आशारामजी बापूजी के सत्संग-प्रवचन से) जो अपने आत्मा को ‘मैं’ और व्यापक ब्रह्म को ‘मेरा’ मानकर स्वयं को प्राणिमात्र के हित में लगाके अपने अंतरात्मा में विश्रांति पाता है वह राम के रास्ते है | जो शरीर को ‘मै’ व संसार को ‘मेरा’ मानकर दसों इन्द्रियों द्वारा बाहर की वस्तुओं से ...

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Mantra Jap on Dussehra

 दशहरे के दिन
  दशहरा  के दिन शाम को जब सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो सर्व सिद्धिदायी विजय काल कहलाता है |
उस समय घूमने-फिरने मत जाना | दशहरा मैदान मत खोजना ... रावण जलाता हो देखकर क्या मिलेगा ? धूल उड़ती होगी, मिटटी उड़ती होगी रावण को जलाया उसका धुआं वातावरण मे होगा .... गंदा वो श्वास में लेना .... धूल, मिटटी श्वास में लेना पागलपन है |
ये दशहरे के दिन शाम को घर पे ही स्नान आदि करके, दिन के कपडे बदल के शाम को धुले हुए कपडे पहनकर ज्योत जलाकर बैठ जाये | थोडा
" राम रामाय नम: ।  "
मंत्र जपते, विजयादशमी है ना तो रामजी का नाम और फिर मन-ही-मन  गुरुदेव को प्रणाम करके गुरुदेव सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है की हम विजय के लिए ये मंत्र जपते है -
"ॐ अपराजितायै नमः "
ये मंत्र १ - २ माला जप करना और

इस काल में श्री हनुमानजी का सुमिरन करते हुए इस मंत्र की एक माला जप करें :-

"पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।
कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥"

पवन तनय समाना की भी १ माला कर ले उस विजय काल में, फिर गुरुमंत्र की माला कर ले । फिर देखो अगले साल की दशहरा तक गृहस्थ में जीनेवाले को बहुत-बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते है |

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Sureshanandji Faridabad - 29th Sep.2012

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