श्राद्ध की महिमा 
श्राद्ध की महिमा
(संत श्री आशारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन एवं शास्त्रों से )
जीवात्मा का अगला जीवन पिछले संस्कारो से बनाता है | अत: श्राद्ध करके यह भावना की जताई है कि उनका अगला जीवन अच्छा हो |श्रद्धा और मंत्र के मेल से पितरो की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे श्राद्ध कहते है | इसमें पिंडदानादि श्रद्धा से दिये जाते है | जिन पितरों के प्रति हम कृतज्ञतापूर्वक श्रद्धा व्यक्त करते है, वे हमारे जीवन की अडचनों को दूर करने में हमारी सहायता करते है |
'वराह पुराण' में श्रद्धा की विधि का वर्णन करते हुए मार्कन्ड़ेयजी गौरमुख ब्राम्हणसे कहते है :'विप्रवर ! छहों वेदांगों को जाननेवाले, यज्ञानुष्ठान में तत्पर, भानजे, दौहित्र, श्वसुर, जामाता, मामा, तपस्वी ब्राम्हण, पंचाग्नि में तपनेवाले, शिष्य,संबंधी तथा अपने माता-पिता के प्रेमी ब्राम्हणों को श्राद्धकर्म के लिए नियुक्त करना चाहिए |'
'वायु पुराण' में आता है : "मित्रघाती, स्वभाव से ही विकृत नखवाला, काले दाँतवाला, कन्यागामी, आग लगानेवाला, सोमरस (शराब आदि मादक द्रव्य ) बेचनेवाला,जनसमाज में निंदित, चोर, चुगलखोर, ग्राम-पुरोहित, वेतन लेकर पढानेवाला, पुनर्विवहिता स्त्री का पति, माता -पिता का परित्याग करनेवाला, हीन वर्ण की संतान का पालन - पोषण करनेवाला, शुद्रा स्त्री का पति तथा मंदिर में पूजा करके जीविका चलानेवाला - ऐसा ब्राम्हण श्राद्ध के अवसर पर निमंत्रण देने योग्य नहीं है |"
श्राद्धकर्म करनेवालों में कृतज्ञता के संस्कार सहज में दृढ़ होते है, जो शरीर कि मौत के बाद भी कल्याण का पथ प्रशस्त करते है | श्राद्धकर्म से देवता और पितर तृप्त होते है और श्राद्ध करनेवाले का अंत:करण भी तृप्ति का अनुभव करता है | बूढ़े -बुजुर्गो ने आपकी उन्नति के लिए बहुत कुछ करेंगे तो आपके ह्रदय में भी तृप्ति और पूर्णता का अनुभव होगा |
औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहाँ को कैद कर दिया था और पिने के लिए नपा-तुला पानी एक फूटी हुई मटकी में भेजता था | तब शाहजहाँ ने अपने बेटे को लिख भेजा : “धन्य है वे हिंदू जो अपने मृतक माता-पिता को भी खीर और हलुए-पूरी से तृप्त करते है और तू जिन्दे बाप को एक पानी की मटकी तक नही दे सकता ? तुमसे तो वे हिंदू अच्छे, जो मृतक माता-पिता की भी सेवा कर लेते है |”
भारतीय संस्कृति अपने माता-पिता या कुदुम्ब-परिवार का ही हित नहीं, अपने समाज या देश का ही हित नहीं वरन पुरे विश्व का हित चाहती है |
View Details: 6092

|
Comments
|
Good info Created by Pharmg739 in 1/23/2013 12:00:06 AM Very nice site!
|
|
Good info Created by Pharmc911 in 1/22/2013 11:59:04 PM Very nice site! cheap cialis http://aieypxo.com/toasqs/4.html
|
|
Good info Created by Pharmf429 in 1/22/2013 11:58:00 PM Very nice site! cheap cialis[/url]
|
|
Good info Created by Pharmb793 in 1/22/2013 11:57:12 PM Very nice site! <a href="http://aieypxo.com/toasqs/1.html">cheap viagra</a>
|
|
Good info Created by Pharma937 in 1/22/2013 11:56:42 PM Hello! aeebbff interesting aeebbff site! I'm really like it! Very, very aeebbff good!
|
|
OM me sab aa gaya Created by Sant Bharat Ram in 10/15/2012 11:10:06 AM Sab Brahm Hai, OM OM OM OM... Isme sab mantro ka labh aa gaya. श्राद्धकर्म से देवता और पितर तृप्त होते है और श्राद्ध करनेवाले का अंत:करण भी तृप्ति का अनुभव करता है |
|
|
JAI GURUDEV Created by jayeshjadhav2011 in 10/13/2012 5:50:09 AM BAPUJI KO KOTI KOTI NAMAN
|
|
New Comment Created by deepak awate in 10/11/2012 1:13:08 AM Prath smrniy pujay bapu ke charno me koti koti pranam. Bapu apko sdguru ke roop me pakar hm apna jivan dhanya mante h. Apke darshan matra se chitany ata h. Kripa banaye rakhana. Hari om.
|
|
New Comment Created by Subodh Arora in 10/6/2012 5:38:04 PM Param pujya Guruji ke charno me koti koti Vandan, aapko guruji ke roop me pakar mera yah jivan safal ho gaya. anyatha chhin chinn badlo ki bhati 84 ke chakkar me bhatkate rahta.
|
|
New Comment Created by Subodh Arora in 10/6/2012 5:35:19 PM Param pujya Guruji ke charno me koti koti Vandan, aapko guruji ke roop me pakar mera yah jivan safal ho gaya. anyatha chhin chinn badlo ki bhati 84 ke chakkar me bhakta rahta.
|
|
|
|
|
|